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हल्द्वानी में ड्यूटी से लौट रहे रोडवेज चालक को कैंटर ने कुचला, अस्पताल ले जाते समय हुई मौत

Published: Mon, 08 Jun 2026 08:15 PM (GMT+05:30)

हल्द्वानी के गौलापार में तेज रफ्तार कैंटर ने रोडवेज चालक अजय सिंह कुंजवाल को कुचल दिया, जिससे अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. तेज रफ्तार कैंटर ने रोडवेज चालक को कुचला

  2. हादसे में गंभीर घायल चालक की रास्ते में मौत

  3. आरोपी चालक गिरफ्तार, कैंटर पुलिस ने किया सीज

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। गौलापार में तेज रफ्तार कैंटर ने रोडवेज चालक को कुचल दिया। हादसे में गंभीर रूप से घायल चालक ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने आरोपित चालक को हिरासत में ले लिया है और कैंटर को सीज कर दिया है।

मूल रूप से अल्मोड़ा स्थित जैंती के कुंज गांव निवासी अजय सिंह कुंजवाल (44) का परिवार वर्तमान में गौलापार के पश्चिमी खेड़ा में रहता है।

काठगोदाम डिपो में आश्रित कोटे से बतौर चालक अजय रविवार को ड्यूटी के बाद पैदल ही घर की ओर लौट रहे थे। जब वह अपने घर के पास पहुंचे, तभी आइडीबीआइ बैंक के पास चोरगलिया की ओर से आ रहे तेज रफ्तार कैंटर ने उन्हें टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि वह करीब 30 मीटर दूर गिरे। वारदात को अंजाम देकर चालक कैंटर को मौके पर छोड़कर फरार हो गया, जिसे बाद में पुलिस ने पकड़ लिया।

इधर, हादसे की सूचना मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन बिष्ट तुरंत मौके पर पहुंचे। वे लहूलुहान हालत में अजय को लेकर अस्पताल के लिए रवाना हुए, लेकिन अजय ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

काठगोदाम एसएचओ जसवीर सिंह चौहान ने बताया कि आरोपी चालक को पकड़ लिया गया है और वाहन को कब्जे में ले लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

पहले टक्कर मारी, फिर बैक कर बुरी तरह कुचला

अर्जुन बिष्ट ने बताया कि कैंटर चालक ने पहले अजय को टक्कर मारी, फिर वाहन को बैक किया। हादसा इतना भयावह था कि उनकी रीढ़ की हड्डी बाहर निकल गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपित चालक नशे में धुत था। वह कैंटर छोड़कर भागा और झाड़ियों के बीच छिप गया था। जहां से पुलिस ने उसे पकड़ा।

मां के सामने चल गई दोनों बेटों की जान

हादसे में जान गंवाने वाले अजय के घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां के सामने एक-एक करके दोनों बेटों की जान चली गई है। अजय के बड़े भाई वीरेंद्र कुंजवाल को पिता मोती सिंह कुंजवाल की मौत के बाद आश्रित कोटे से नौकरी मिली थी।

वर्ष 2008 में वीरेंद्र की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। तब उनकी जगह अजय को नौकरी मिली। वह घर पर इकलौते कमाऊ सदस्य थे। अब उनकी भी दुर्घटना में मौत हो गई। वह अपने पीछे पत्नी कंचन कुंजवाल, दो बेटियों, एक बेटे और मां को छोड़ गए हैं।

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