उत्तराखंड में दलितों के अपमान पर कांग्रेस का हल्ला, पिछड़ों के अपमान पर चुप्पी क्यों?
कांग्रेस हल्द्वानी में दलितों के अपमान का मुद्दा उठा रही है, जबकि भाजपा उस पर पिछड़े वर्ग के अधिकारी के ...और पढ़ें

कांग्रेस की रैली में ओबीसी समुदाय से आने वाले एसएसपी को दी गईं थी गालियां व जान से मारने की धमकी. File Photo

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
विजय यादव, हल्द्वानी। आठ अगस्त की शंखनाद रैली के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए शुद्धीकरण हवन के बहाने कांग्रेस दलितों के अपमान का मुद्दा उठाकर भाजपा व आरएसएस को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही है।
उत्तराखंड के साथ ही उत्तर प्रदेश और पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है। जाहिर है कि कांग्रेस इस बहाने एक नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश कर रही है। 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले भी पार्टी ने यह प्रचारित किया था कि अगर भाजपा को चार सौ से अधिक सीटें मिलती हैं तो वह संविधान को खत्म कर देगी।
अब कांग्रेस एक बार फिर ऐसा प्रयास करते दिख रही है, लेकिन वह रैली के दिन अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा ओबीसी समुदाय के एक अधिकारी के साथ गाली-गलौज करने औऱ जान से मारने की धमकी देने के कृत्य को नजरअंदाज कर रही है। यह अधिकारी हैं नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजुनाथ टीसी, जो कर्नाटक के पिछड़ा वर्ग से आते हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे की विजय शंखनाद रैली
बता दें, आठ अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे रामलीला मैदान में आयोजित विजय शंखनाद रैली में पहुंचे थे। कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया। रैली में आ रहे कार्यकर्ताओं के वाहनों को जगह-जगह चेकिंग के नाम पर पुलिस की ओर से रोकने पर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एसएसपी दफ्तर धमक गए थे। एसएसपी डा. मंजुनाथ टीसी तब कार्यालय में नहीं थे।
इसी दौरान एसएसपी के लिए अपशब्द कहे गए। उन्हें जान से मारने तक की धमकी भी दी गई। इसका वीडियो भी प्रसारित हो गया। रैली के दो दिन बाद हुए शुद्धीकरण हवन को कांग्रेस मुद्दा बनाकर दलित समाज के अपमान से जोड़ रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि पिछड़े वर्ग के अधिकारी का अपमान कर व जान से मारने की धमकी देकर कांग्रेस दोरंगी राजनीति कर रही है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता व उत्तराखंड राज्य स्तरीय जलागम परिषद के उपाध्यक्ष शंकर कोरंगा इसे कांग्रेस का दोहरा चरित्र करार दे रहे हैं। कोरंगा कहते हैं कि कांग्रेस दलितों और ओबीसी की बात केवल दिखावे के लिए करती है। वास्तव में वह इस मुद्दे पर राजनीतिक रोटी सेंक रही है।
यह भी पढ़ें- Mallikarjun Shuddhikaran Controversy: जिस मैदान की देश भर में चर्चा, उस पर नशेड़ियों-गंदगी का कब्जा
अगर उसे वास्तव में दलितों व पिछड़ों से इतना ही प्यार है, तो अपनी पार्टी के उन नेताओं के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं करती, जिन्होंने पिछड़े समाज से आने वाले एसएसपी का अपमान किया। एसएसपी आफिस में हुई इस घटना के बाद भाजपा नेताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए जुलूस भी निकाला था।
अब कांग्रेस के खरगे के बहाने दलितों के अपमान का मुद्दा उठाने पर भाजपा ओबीसी के अपमान को उठाकर उसे आईना दिखाने का प्रयास कर रही है। पार्टी का मानना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक माहौल बनाने के लिए कांग्रेस के नेता शुद्धीकरण हवन को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं जबकि इसमें शामिल लोगों से भाजपा का कोई वास्ता तक नहीं है।
