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उत्तराखंड के घनश्याम भट्ट: नाना पाटेकर की शक्ल, संवाद और अभिनय में जिंदा हैं दिग्गज अभिनेता

Published: Thu, 08 Oct 2026 09:43 PM (GMT+05:30)

उत्तराखंड के घनश्याम भट्ट, जिन्हें नाना पाटेकर के नाम से जाना जाता है, ने दिग्गज अभिनेता के घर जाने का ...और पढ़ें

घनश्याम भट्ट

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ललित मोहन बेलवाल, जागरण, हल्द्वानी मैं नाना पाटेकर के घर गया लेकिन मेरा दुर्भाग्य रहा कि वह उस दिन शूटिंग पर बाहर थे, इसलिए उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। जितने सादगी पसंद नाना पाटेकर थे, उतनी ही सरल और सौम्य उनकी मां निर्मला पाटेकर। मुझे देखकर वह कुछ देर ठिठक सी गई।

उन्होंने न सिर्फ अपने हाथों से बनी चाय पिलाई, बल्कि निकलते हुए पिठियां (टीका) भी लगाया। यह बताया नाना पाटेकर के हमशक्ल और हूबहू उनकी आवाज में संवाद अदायगी के कारण पहचाने जाने वाले हल्द्वानी के घनश्याम भट्ट ने। उत्तराखंड में लोग उन्हें घनश्याम की बजाय नाना पाटेकर के नाम से ही जानते व पुकारते भी हैं।

नाना पाटेकर के निधन पर जाने-माने रंगकर्मी घनश्याम भट्ट ने दिग्गज अभिनेता के घर जाने का किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि करीब 20 वर्ष पहले वह अपने बेटे को एक इंस्टीट्यूट में प्रवेश दिलाने पुणे गया था। लौटते समय नाना पाटेकर के मुंबई स्थित घर माटूंगा भी गया।

यह मुलाकात उनके मित्र और डोल आश्रम के मुख्य महंत श्री कल्याण दास महाराज के शिष्य अविनाश ने कराई थी। अविनाश नाना पाटेकर के रिश्तेदार हैं। जब मैं नाना के घर पहुंचा तो वहां पहाड़ जैसी ही सादगी नजर आई।

ये आपके ही बेटे हैं, जो बचपन में खो गए

जैसे ही मैं नाना के घर पहुंचा तो वहां उनके बड़े भाई बनियान में बैठे थे। हमशक्ल होने की वजह से अविनाश ने नाना की मां निर्मला जी से मेरा परिचय कराते हुए कहा कि ये आपके ही बेटे हैं जो बचपन में कहीं खो गए थे। यह सुनते ही मां कुछ देर देखती रही और फिर मुस्कुराते हुए दुलार किया। उनके साथ तब हल्द्वानी के ही विनोद पांडे और महेश तिवारी भी थे।

रंगमंच में जो मिला, नाना के नाम से मिला

घनश्याम भट्ट ने बताया कि वह वर्ष 2000 से रंगमंच से जुड़े। उन्होंने बहुरानी, कगार की आग जैसी फिल्मों में मुख्य किरदार निभाया। दूरदर्शन के धारावाहिक कुली बेगार आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानी हरगोविंद पंत का अभिनय किया।

बोले-भले ही नाना पाटेकर से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई लेकिन वह हमेशा से उनके दिल में रहे। रंगमंच में जो मुकाम हासिल किया, वह नाना की वजह से ही है।

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