नैनीताल, जागरण संवाददाता : विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन प्रीतू शर्मा की कोर्ट ने समाज कल्याण विभाग में हुए छात्रवृत्ति घोटाला मामले में आरोपित ऊधमसिंह नगर के जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर की दो मामलों में अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उन पर अलग-अलग थानों में छात्रवृत्ति घोटाले से संबंधित 43 मुकदमे दर्ज हैं। पिछली बार भी दस मामलों में उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी। अब जिला समाज अधिकारी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।

सोमवार को सुनवाई के दौरान डीजीसी फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने दलील दी कि एसआइटी ने मां गंगा कॉलेज ऑफ एजुकेशन दुजाना जिला झज्जर हरियाणा के छात्रों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने कॉलेज में एडमिशन लिया, न ही बैंक में खाता खोला गया। यही जवाब बाबा मोहनदस कॉलेज ऑफ एजुकेशन रेवाड़ी के छात्रों ने दिया। आरोपित ने हरियाणा के शिक्षण संस्थान के उन छात्रों को छात्रवृत्ति दे दी, जिनकी एडमिशन ही नहीं था। हरियाणा के वाइपीएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन वीपीओ ककरोली सरदारा भिवानी हरियाणा में 27 छात्रों में से 24 का सत्यापन किया गया तो उक्त में से किसी ने संस्थान में एडमिशन नहीं लिया। इस मामले में शंखधर के साथ ही सहायक समाज कल्याण अधिकारी हरीश नाथ, राजेंद्र कुमार तथा दलाल उदयराज के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

सहकारी बैंक हापुड़ के पूर्व प्रबंधक की भी जमानत अर्जी खारिज

विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण प्रीतू शर्मा की कोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले में गिरफ्तार पूर्व बैंक प्रबंधक की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। डीजीसी फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि जिला सहकारी बैंक के पूर्व प्रबंधक हरिप्रकाश अग्रवाल निवासी हापुड़ ने छात्रों की उपस्थिति के बिना मोनार्ड यूनिवर्सिटी के लेटर पैड पर 28 फर्जी छात्रों के खाते सहकारी बैंक में खोले और किसी भी स्तर पर उनके हस्ताक्षरों का मिलान नहीं किया। फिर जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल से चेक के माध्यम से मिली 78 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मोनार्ड यूनिवर्सिटी के इंडियन ओवरसीज बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिया। जहां से उक्त धनराशि खुर्दबुर्द हो गई। अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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Edited By: Skand Shukla