17 साल बाद मुठभेड़ में मारा गया बदमाश, आज भी रणबीर एनकाउंटर को नहीं भूला देहरादून
देहरादून में प्रेमनगर मुठभेड़ ने राजधानी में अपराध और पुलिस कार्रवाई के बदलते स्वरूप को उजागर किया है, जहां 17 साल बाद किसी मुठभेड़ में बदमाश मारा गया।

सिनर्जी अस्पताल में भर्ती घायल थाना प्रभारी नरेश राठौड़ l जागरण

समय कम है?
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अंकुर अग्रवाल, देहरादून। दून के प्रेमनगर मुठभेड़ ने एक बार फिर राजधानी में अपराध और पुलिस कार्रवाई के बदलते स्वरूप को सामने ला दिया है। पिछले डेढ़-दो वर्षों में शहर और बाहरी इलाकों में जिस तरह लूट, हत्या, रंगदारी, कारोबारी विवाद, हथियारबंद गैंग गतिविधियां और बाहरी अपराधियों की सक्रियता बढ़ी है, उसी अनुपात में पुलिस और बदमाशों के बीच आमना-सामना भी बढ़ा है।
अंतर केवल इतना रहा कि वर्ष 2009 के बाद पुलिस अधिकतर मामलों में आरोपितों को जिंदा पकड़ने की रणनीति अपनाती रही र ज्यादातर मुठभेड़ों में बदमाशों के पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तारी हुई।
तीन जुलाई 2009 को रायपुर के लाडपुर क्षेत्र में गाजियाबाद निवासी रणबीर सिंह की मौत वाली मुठभेड़ के बाद पुलिस पर लंबे समय तक सवाल उठे। मामला फर्जी निकला और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच के बाद 17 पुलिसकर्मियों को सजा हुई।
उसी घटना के बाद से देहरादून पुलिस हर मुठभेड़ में कानूनी, फोरेंसिक और प्रक्रिया संबंधी सतर्कता के साथ आगे बढ़ती रही, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अपराधियों की कार्यशैली बदली है। शहर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बाहरी जिलों से जुड़े अपराधियों की सक्रियता बढ़ी। लूट की घटनाओं में हथियारों का खुला इस्तेमाल, कारोबारी विवादों में फायरिंग और सुनियोजित हत्या के मामलों में अपराधियों की आक्रामकता अधिक दिखाई दी।
तिब्बती मार्केट हत्याकांड: भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में हत्या, फिर मुठभेड़
फरवरी 2026 में तिब्बती मार्केट क्षेत्र में कारोबारी अर्जुन की हत्या के बाद पुलिस ने आरोपितों का पीछा करते हुए अलग-अलग स्थानों पर मुठभेड़ की। दोनों आरोपितों ने पुलिस पर फायरिंग की, लेकिन जवाबी कार्रवाई में दोनों के पैर में गोली लगी और उन्हें घायल अवस्था में पकड़ा गया।
डोईवाला में कारोबारी विवाद ने लिया मुठभेड़ का रूप
व्यापारी पर फायरिंग के आरोपितों को पकड़ने गई पुलिस पर डोईवाला क्षेत्र में भी गोली चली। यहां दो बदमाश घायल होकर दबोचे गए।
बसंत विहार में पश्चिमी उप्र के गैंग से भिड़ंत
बसंत विहार क्षेत्र में देर रात वाहन चोरी और हथियारबंद गतिविधियों में सक्रिय दो बदमाशों को घेरते समय पुलिस से सीधी भिड़ंत हुई। एक आरोपित के पैर में गोली लगी।
राजपुर में ब्रिगेडियर हत्याकांड
जंगल तक पीछा अप्रैल 2026 में रिटायर्ड ब्रिगेडियर की हत्या के आरोपित राजपुर क्षेत्र के जंगलों में घिरे। वहां भी पुलिस पर फायरिंग हुई। जवाबी कार्रवाई में एक आरोपित घायल हुआ और पकड़ा गया।
अपराधियों का नया पैटर्न
हालिया घटनाओं में तीन प्रवृत्तियां स्पष्ट हुई हैं, जिसमें एक यह रही कि वारदात के तुरंत बाद जंगल या बाहरी मार्गों की ओर भागना और पीछा करती पुलिस पर सीधे फायर करना। अन्य राज्यों के नेटवर्क से जुड़ाव भी एक कारण रहा। लेकिन, प्रेमनगर मुठभेड़ इसलिए अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यहां लूट के बाद तीन बदमाश सीधे जंगल में घुसे और पुलिस टीम पर फायरिंग की।
थाना प्रभारी नरेश राठौर घायल हुए, जबकि जवाबी फायरिंग में एक बदमाश की मौत हुई और एक गोली लगने से घायल हो गया। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्ष 2009 की पृष्ठभूमि के कारण अब हर मुठभेड़ में मेडिकल, बैलिस्टिक, फोरेंसिक और मजिस्ट्रियल जांच निर्णायक होगी।
