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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 25, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आईएफएस संजीव चतुर्वेदी मामले में कैबिनेट सचिव को अवमानना नोटिस जारी, यह है मामला

Published: Sun, 25 May 2025 03:05 PM (GMT+05:30)

नैनीताल कैट ने आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की एसीआर से जुड़े मामले में कैबिनेट सचिव सीवीसी सचिव और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ...और पढ़ें

आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की एसीआर से संबंधित मामला। जागरण आर्काइव
आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की एसीआर से संबंधित मामला। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी
  2. 21 मई को सुनवाई कर जारी किया यह अवमानना नोटिस

जागरण संवाददाता, नैनीताल। केंद्रीय प्रशासनिक प्राधिकरण की नैनीताल की सर्किट बैंच ने मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान हल्द्वानी(नैनीताल) व उत्तराखंड कैडर के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की एसीआर से संबंधित मामले में कैबिनेट सचिव टीवी. सोमनाथन, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्र और केंद्रीय सतर्कता आयोग के सचिव पी. डेनियल को अवमानना नोटिस जारी किए है।

यह पहली बार है जब कैट ने किसी अधिकारी के सेवा संबंधी मामले में देश के कैबिनेट सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया गया है।

दिसंबर 2017 में केंद्र सरकार ने इस मामले में कैबिनेट सचिव का नाम हटाने के लिए कैट के समक्ष एक आवेदन दायर किया था। हालांकि, अप्रैल 2018 में कैट ने उस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि प्रतिनियुक्ति पद पर अधिकारी का चयन कैबिनेट सचिव की मंजूरी से किया गया था और इस याचिका में अधिकारी की ओर से मांगी गई राहत उनके विरुद्ध है, इसलिए वह इस मामले में एक प्रतिवादी बने रहेंगे।

कैट की खंडपीठ ने 21 अप्रैल को इन तीनों अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना नोटिस जारी करते हुए यह आदेश दिया कि, "उन्हें कारण बताना होगा कि न्यायधिकरण की ओर से 23 फरवरी 2023 और 23 मार्च 2023 को पारित आदेशों की अवहेलना करने पर उनके विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। मामले की सुनवाई की अगली तिथि नौ जुलाई तय की गई है।

23 फरवरी 2023 को कैट ने संजीव चतुर्वेदी की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया था, जिसमें कैबिनेट सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव, और केंद्रीय सतर्कता आयोग के सचिव को उन दस्तावेजों को उपलब्ध कराने को कहा गया था, जो कुछ हाई प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामलों में संजीव चतुर्वेदी की ओर से एम्स दिल्ली में मुख्य सतर्कता अधिकारी रहते हुए की गई जांचों के अंतिम निष्कर्ष और कथित रूप से बंद की गई जांचों से संबंधित थे।

चतुर्वेदी ने यह आरोप लगाया था कि इन मामलों में की गई उनकी कार्रवाई के कारण ही वित्तीय वर्ष 2015-16 की उनकी एप्रेजल रिपोर्ट की ग्रेडिंग जानबूझकर कम कर दिया गया था, जिसके विरुद्ध उन्होंने जुलाई 2017 में कैट में याचिका दायर की थी।

मार्च 2023 में एक बार फिर कैट ने कैबिनेट सचिव, सीवीसी सचिव और मामले से जुड़े अन्य अधिकारियों को इन सभी दस्तावेजों की प्रति चतुर्वेदी को उपलब्ध कराने का आदेश दिया था तो एम्स, दिल्ली ने इन आदेशों के विरुद्ध नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दी। मई 2023 में हाईकोर्ट ने ने कैट के दोनों आदेशों पर रोक लगा दी थी।

मई, 2024 में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव और केंद्रीय सतर्कता आयोग एम्स के मामले में पारित स्थगन आदेशों के दायरे में नहीं आते हैं।

हाईकोर्ट क संशोधित आदेशों के बाद, संजीव ने दिसंबर 2024 में कैट की नैनीताल सर्किट पीठ के समक्ष इन तीन अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के संशोधन आदेश पारित किए जाने और इस संबंध में उन्हें सूचित किए जाने के बाद भी कैट की ओर से आदेशित दस्तावेजों की प्रतिलिपि उन्हें उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। कैट की सर्किट बैंच के न्यायिक सदस्य अजय प्रताप सिंह व प्रशासनिक सदस्य संजीव कुमार की खंडपीठ ने 21 मई को सुनवाई कर यह अवमानना नोटिस जारी किया है।

अवमानना नोटिस का दसवां मामला

नैनीताल: यह दसवां ऐसा मामला है जिसमें संजीव चतुर्वेदी के प्रकरण में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया गया है, इससे पहले, अक्टूबर 2024 में नैनीताल हाई कोर्ट ने केंद्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण मंत्रालय के सचिव को मार्च 2024 व सितंबर 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को, फरवरी 2023 में कैट की ओर से केंद्रीय वन व पर्यावरण सचिव को भी अवमानना नोटिस जारी किया गया ।

इसके अलावा फरवरी 2019 में नैनीताल हाई कोर्ट ने तत्कालीन कैट चेयरमैन को, जुलाई 2019 में नैनीताल हाई कोर्ट ने ही तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया था।