नैनीताल, जेएनएन : उच्च न्यायालय नैनीताल ने कोर्ट के आदेश के बाद भी सुविधाओं का बकाया जमा नहीं करने पर रूलक संस्था देहरादून की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। मामले में कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व सीएम बीसी खंडूरी, पूर्व सीएम व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक तथा उत्तराखंड के मुख्य सचिव ओमप्रकाश को अवमानना नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

 

शुक्रवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ में रूरल लिटिगेशन एंड एंटाइटेलमेंट केंद्र (रुलक) की अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने पूछा है कि आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया गया है और क्यों नहीं इन पूर्व सीएम के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने कहा है कि यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। राजनीतिक जिम्मेदारी वाले पक्षकारों को जनता के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए । यदि आदेश का अनुपालन नहीं होता है, तो अगली तारीख तक वे कारण बताएंगे क्यों न उनके खिलाफ न्यायालय अधिनियम के तहत आरोप तय किए जा जाएं।

 

अदालत ने रजिस्ट्री को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून के माध्यम से नियमित सेवा के अलावा नोटिस की सेवा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। संस्था ने पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी को इस सम्बंध में संविधान के अनुछेद 361 में नोटिस भेजा है क्योंकि उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने से पहले दो माह पहले सूचना देनी आवश्यक होती है। अभी उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर नहीं की गई है। कोर्ट ने मई 2019 में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवासों का किराया व अन्य सुविधाओं का भुगतान छह माह के भीतर करने का आदेश पारित किया था। परन्तु अभी तक उनके द्वारा यह भुगतान नहीं किया गया इसलिए लिए संस्था ने इनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है।

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