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यह कैसी इंजीनियरिग? नैनीताल रोड की मुसीबत लालकुआं में धकेल दी; बिंदुखत्ता तक लोग परेशान

Uttarakhand Rains हल्द्वानी में ड्रेनेज का कोई सिस्टम अब तक नहीं है। नैनीताल रोड पर अंडरग्राउंड पासिंग सिस्टम बनाकर देवखड़ी नाले का सारा पाना सिंचाई नहर में छोड़ दिया गया। इससे लालकुआं विधानसभा में तीनपानी गोरापड़ाव मोटाहल्दू लालकुआं से लेकर बिंदुखत्ता तक का क्षेत्र जलमग्न नजर आया। ईई लोनिवि अशोक कुमार ने बताया कि सीएम घोषणा के तहत प्रस्ताव की स्वीकृति के हिसाब से ही विभाग ने काम किया है।

By govind singh Edited By: Nirmala Bohra Wed, 10 Jul 2024 01:05 PM (IST)
Uttarakhand Rains: पिछले साल तक टेड़ी पुलिया के पास हाईवे पर बहता था देवखड़ी नाले का पानी

गोविंद बिष्ट, जागरण, हल्द्वानी। Uttarakhand Rains: हर मानसून में नैनीताल रोड पर टेड़ी पुलिया के आसपास करीब 200 मीटर हिस्से में जलभराव की स्थिति पैदा होती थी। देवखड़ी नाले का पानी पहुंचने पर यह स्थिति बनती थी।

मगर इस साल मानसून की शुरुआत में ही यह सारा पानी तीनपानी से लेकर लालकुआं-बिंदुखत्ता तक पहुंच गया। जिस वजह से ब बड़ी आबादी के लिए संकट की स्थिति पैदा हो गई। और इस समस्या की वजह वो इंजीनियरिंग है जिससे नैनीताल रोड पर अंडरग्राउंड पासिंग सिस्टम बनाकर देवखड़ी नाले का सारा पाना सिंचाई नहर में छोड़ दिया। ऐसे में सवाल खड़े होता हैं कि ये इंजीनियरिंग का कौन सा नमूना है, जिसने समस्या का जड़ से समाधान करने की बजाय उसे दूसरी जगह पहुंचा दिया।

हल्द्वानी में ड्रेनेज का कोई सिस्टम नहीं

कुमाऊं के प्रवेशद्वार हल्द्वानी में ड्रेनेज का कोई सिस्टम अब तक नहीं है। ऐसे में बरसात होते ही जगह-जगह जलभराव हो जाता है। रविवार को शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में भारी बरसात की वजह से काफी नुकसान हुआ है। वहीं, नैनीताल रोड पर टेड़ी पुलिया के पास हर साल मानसून में जलभराव होता था। जिसकी वजह दमुवाढूंगा की तरफ से आने वाले देवखड़ी नाले का पानी था।

200 मीटर के दायरे में पानी जमा होने के बाद बरसात थमने पर ही हालात सामान्य होते थे। इसके बाद लोनिवि को इस समस्या के समाधान का जिम्मा सौंपा गया। विभाग ने हाईवे के अंदर भूमिगत सिस्टम तैयार कर पानी को सड़क पार नहर में छोड़ दिया। अब इस बरसात में टेड़ी पुलिया के आसपास तो ज्यादा दिक्कत नहीं आई। लेकिन लालकुआं विधानसभा में तीनपानी, गोरापड़ाव, मोटाहल्दू, लालकुआं से लेकर बिंदुखत्ता तक का क्षेत्र जलमग्न नजर आया। यहां का रेलवे स्टेशन तक सोमवार को पानी में डूबा दिखा।

जबकि खेतों में गंदगी के ढेर लग गए। हर कोई यही कहता नजर आया कि मानसून के पुराने सीजनों में इससे ज्यादा बरसात होने पर भी इतनी बुरी स्थिति नहीं हुई। वहीं, मामले को लेकर ईई लोनिवि अशोक कुमार ने बताया कि सीएम घोषणा के तहत प्रस्ताव की स्वीकृति के हिसाब से ही विभाग ने काम किया है।

1976 में बनी नहर कितना दबाव झेलेगी?

टेड़ी पुलिया के बाद वर्कशाप लाइन, डीएम कैंप आफिस के पीछे से नगर निगम के बगल से मुखानी। इसके बाद सुशीला तिवारी के पीछे से गुजरने के बाद ये नहर तीनपानी होते हुए लालकुआं तक जाती है। सिंचाई विभाग का कहना है नहर का निर्माण 1976 में हुआ था। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि 48 साल पुरानी नहर कितना दबाव झेलेगी।

विधायक ने सीएम के सामने रखी समस्या

मंगलवार को सीएम पुष्कर सिंह धामी के हल्द्वानी दौरे के दौरान लालकुआं विधायक डा. मोहन सिंह बिष्ट ने मुख्यमंत्री के समक्ष इस मामले को रखा। विधायक का कहना था कि चार-पांच माह पहले उन्होंने सिंचाई विभाग और प्रशासन को इस समस्या से अवगत भी कराया था। फौरी तौर पर कुछ जगहों पर नहर की ऊंचा कर बचाव किया जा सकता है। अब प्रशासन समाधान खोजने में जुटा है।

जो प्रोजेक्ट जमीन पर ही नहीं, उसे बता रहे समाधान

सीएम के समक्ष मामला उठने पर अधिकारियों ने एडीबी के ड्रेनेज प्रोजेक्ट को लालकुआं के लोगों की समस्या का समाधान बताया। जबकि हकीकत यह है कि एडीबी से मिले बजट के लिए शासन ने यूयूएसडीए को निर्माणदायी संस्था बनाया है। यूयूएसडीए ने 104 करोड़ रुपये का ड्रेनेज प्रस्ताव तैयार किया। लेकिन अभी स्वीकृति नहीं मिली। जबकि मानसून सीजन तो सिर पर खड़ा है।

इस नहर की क्षमता 400 क्यूसेक पानी की है। लेकिन देवखड़ी नाले का पानी आने की वजह से बरसात के दौरान 700 क्यूसेक पानी चलने लगा। नाले का पानी नहर में न छोड़ने के लिए लोनिवि को कई बार पत्र भेजा गया था।

- बीसी नैनवाल, ईई सिंचाई विभाग