आनंद मिश्रा, हल्द्वानी: मिट्टी की सेहत जांचने के लिए अब कुमाऊं भर में प्रशिक्षित युवाओं की कमी नहीं रहेगी। विभिन्न ट्रेड में औद्योगिक प्रशिक्षण देने वाला उत्तराखंड राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) हल्द्वानी अब छात्रों को मिट्टी की जांच करने की ट्रेनिंग भी दे रहा है। संस्थान में नए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के तहत मृदा परीक्षण कोर्स को शामिल किया गया है ----------- 21 स्टूडेंट्स ले रहे प्रशिक्षण प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशक पंकज पांडे के निर्देशन में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सॉयल टेस्टिंग एंड क्रॉप टेक्निशयन के छात्रों को कृषि विभाग की रुद्रपुर शोधशाला और पंतनगर में सॉयल टेस्टिंग लैब में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 2017-18 के पहले चरण में 21 युवक प्रशिक्षण ले रहे हैं। ------- ये होंगे फायदे सॉयल टेस्टिंग से सबसे ज्यादा फायदा किसानों को होगा। स्वरोजगार बढ़ेगा। इसके अलावा जिन विभागों खासकर कृषि, उद्यान, जलागम, अन्य कार्यदायी संस्थाओं में इसकी आवश्यकता पड़ेगी, वहां सॉयल टेस्टिंग का एक वर्क मैन तैयार मिलेगा। --------- क्या है मृदा परीक्षण एक मृदा के किसी नमूने की रासायनिक जांच है। जिससे भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा के बारे में जानकारी मिलती है। इस परीक्षण का उद्देश्य भूमि की उर्वरकता मापना और यह पता करना है कि भूमि में कौन से तत्वों की कमी है। ------------ कोर्स में क्या खास होगा सॉयल टेस्टिंग एंड क्रॉप टेक्निशयन एक स्किल डेवलेपमेंट कोर्स है। इसके तहत छात्र मृदा के गुणों को पहचान करने के साथ किस जलवायु, किस फसल की पैदावार अच्छी व खराब होगी यह भी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। ------------- मृदा प्रशिक्षण लेने के बाद छात्र स्वावलंबी होंगे। इससे पता चल सकेगा कि किस मिट्टी में कौन सी फसल उगाना लाभकारी होगा। कम भूमि में अधिक पैदावार की जानकारी प्रशिक्षण के बाद छात्र आसानी उपलब्ध करा पाएंगे। - आरडी पालीवाल, अपर निदेशक प्रशिक्षण