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Binsar Wildlife Sanctuary Fire: कैलाश ने सु‍बह बेटे से फोन पर कहा, 'अच्छे से पढ़ना मैं जंगल बचाने जा रहा हूं' और फि‍र दांव पर लगा दी जान

Binsar Wildlife Sanctuary Fire लाल लपटों के कब्जे से हरियाली को छुड़ाने की जिम्मेदारी वन विभाग के फ्रंटलाइन की है। जंगल की आग बुझाने गए चार कर्मचारी जलने से अपनी जान गंवा बैठे बिनसर हादसे में गंभीर रूप से झुलसे 54 वर्षीय कैलाश भट्ट 24 साल पहले विभाग में दैनिक श्रमिक के तौर पर जुड़ने के बावजूद अब भी नियमित होने का इंतजार कर रहे हैं।

By govind singh Edited By: Nirmala Bohra Sat, 15 Jun 2024 10:05 AM (IST)
Binsar Wildlife Sanctuary Fire: कैलाश ने सु‍बह बेटे से फोन पर कहा, 'अच्छे से पढ़ना मैं जंगल बचाने जा रहा हूं' और फि‍र दांव पर लगा दी जान
Binsar Wildlife Sanctuary Fire: बिनसर घटना में गंभीर घायल दैनिक श्रमिक एम्स के लिए किए गए एयरलिफ्ट

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : Binsar Wildlife Sanctuary Fire: लाल लपटों के कब्जे से हरियाली को छुड़ाने की जिम्मेदारी वन विभाग के फ्रंटलाइन की है। इसमें दैनिक श्रमिक से लेकर रेंज टीम तक का नाम आता है। बंगले और गाड़ियों की सुविधा पाने वाले अधिकारियों का काम सिर्फ दफ्तर में बैठकर निर्देश देना और कुछ अच्छा होने पर श्रेय हड़पना भर रह गया है।

अब बात बिनसर हादसे में गंभीर रूप से झुलसे 54 वर्षीय कैलाश भट्ट की, जो 24 साल पहले विभाग में दैनिक श्रमिक के तौर पर जुड़ने के बावजूद अब भी नियमित होने का इंतजार कर रहे हैं। घटना की सुबह बेटे को फोन कर इतना कहा कि अच्छे से पढ़ाई करना। मैं जंगल बचाने जा रहा हूं।

गुरुवार को बिनसर के जंगल में हुई घटना ने हर किसी को झकझोर दिया है। जंगल की आग बुझाने गए चार कर्मचारी जलने से अपनी जान गंवा बैठे, जबकि चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायलों में ग्राम घनेली जिला अल्मोड़ा निवासी कैलाश भट्ट भी शामिल हैं। पद भले दैनिक श्रमिक का हो, लेकिन अनुभव सबसे ज्यादा उन्हीं के पास था। बेटा विवेक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए काशीपुर में रहकर पढ़ाई कर रहा है। उसने बताया कि गुरुवार सुबह पिता ने फोन कर कहा, 'बेटा अच्छे से पढ़ाई करना। मैं जंगल बचाने जा रहा हूं।'

फिर दिन में फोन न आने पर विवेक को चिंता होने लगी, क्योंकि पिता रोजाना दोपहर में भी फोन कर हाल-चाल लेते थे। इसके बाद विवेक ने घर और अन्य लोगों को फोन मिलाया। बाद में उन्हें पता चला कि पिता आग की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस चुके हैं।

फिलहाल दैनिक श्रमिक कैलाश को एयरलिफ्ट कर दिल्ली एम्स भेज दिया गया है। वहीं, एसटीएच में मौजूद विवेक ने बताया कि 24 साल की नौकरी के बाद भी पिता की तनख्वाह 18 हजार ही है। छह महीने से भत्ते के पैसे भी नहीं मिले।

पिता के पास फायर किट न मास्क

विवेक के अनुसार, दो मई को अल्मोड़ा जिले में चार नेपाली श्रमिकों की आग बुझाने के दौरान मौत हुई थी। इस घटना से भी वन विभाग के अधिकारियों ने सबक नहीं लिया। पिता व अन्य लोगों के पास न फायर किट थी और न ही आधुनिक मास्क।

घायल पहले दौड़े थे, मरने वाले कुछ दूरी पर गिर गए

बिनसर की घटना का गुरुवार तक अलग-अलग तरीके से आकलन किया जा रहा था, मगर शुक्रवार को एसटीएच पहुंचे गंभीर घायल कैलाश भट्ट के बेटे विवेक ने पिता से बातचीत के आधार पर उनकी आपबीती बयां करते हुए बताया कि जंगल में पहुंचते ही आग ने चारों तरफ से घेर लिया था।

तेज हवाओं के कारण लपटें बढ़ती चली गईं। इसके बाद सब लोग गाड़ी में जाकर बैठ गए, मगर धुएं की वजह से सबकी हालत बिगड़ने लग गई। इसके बाद टीम ने वाहन से नीचे उतरकर दौड़ना शुरू कर दिया, लेकिन जान गंवाने वाले चार लोग पीछे छूट गए। दम घुटने के कारण कुछ दूरी पर ही ये लोग जमीन पर गिर गए।

आतंकियों से लेकर तस्करों तक से भिड़ चुके जंगल के जवान

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1981 से साल 2022 तक कुमाऊं से जुड़े वन विभाग के 22 जवान वनसंपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा की खातिर अपना बलिदान दे चुके हैं। 1990 में तराई में आतंकवाद की स्थिति थी। मई 1992 में तराई पश्चिमी वन प्रभाग से जुडे सहायक वन संरक्षक राम अवतार और उप रेंजर की आतंकियों से मुठभेड़ में जान गई थी।

इस घटना में कई वनकर्मियों को गोली भी लगी। इसके अलावा अलग-अलग प्रभागों से जुड़े वन आरक्षी, वन दारोगा, डिप्टी रेंजर, रेंजर, दैनिक श्रमिक व मोहर्रिर भी बलिदानियों में शामिल हैं।