गणेश जोशी, हल्द्वानी। बेस अस्पताल में बुखार से ग्रस्त 140 मरीज भर्ती हैं। इनके लिए केवल एक फिजीशियन कार्यरत हैं, जिन्हें रामनगर से बुलाया गया है। अगर यही फिजीशियन एक बार के राउंड में सभी मरीजों को नॉन स्टॉप चार मिनट भी देखते हैं तो इसके लिए नौ घंटे का समय चाहिए। अब सवाल उठता है कि क्या दिन भर के एक बार के राउंड में ऐसा संभव हो पाता होगा? ऐसे में भी जब इस अस्पताल में डेंगू से ग्रस्त 37 मरीज भर्ती हों। महामारी जैसे हालात में भी एकमात्र फिजीशियन कितनी देर में मरीजों के पास पहुंच पाते होंगे। इसका अंदाजा  जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं, बल्कि आम आदमी भी लगा सकता है। फिर भी महज औपचारिकता भी निभाई जा रही है। ऐसे में फिजीशियन डॉ. बीडी जोशी भी असहज हो गए हैं। सोमवार को वह आठ बजे अस्पताल पहुंचे। दोपहर ढाई बजे तक राउंड किया। शाम को भी चार से पांच घंटे राउंड करते हैे, लेकिन सभी मरीजों तक पहुंच पाना संभव नहीं हो पाता है। इतने मरीजों के लिए रात में भी केवल दो स्टाफ रहता है।

बिना फिजीशियन के हो रही ओपीडी

बेस अस्पताल में फिजीशियन तो भेज दिया, लेकिन उन्हें भर्ती मरीजों को देखने से ही फुर्सत नहीं मिलती है। ओपीडी में बाल रोग विशेषज्ञ व अन्य डॉक्टर ही बुखार के मरीजों को देख रहे हैं।

एक बेड पर दो मरीज, बेस व एसटीएच के यही हाल

बेस व एसटीएच दोनों के एक जैसे हालात हैं। सोमवार को भी एक बेड पर दो से तीन मरीजों को भर्ती करना पड़ा। जिला प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग अभी तक अलग से बेड बढ़ाने और वैकल्पिक व्यवस्था करने में नाकाम रहा।

जागरूकता अभियान चला, कई जगह फॉगिंग

स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को भी कई क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया। एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं ने पंफलेट वितरित कर लोगों को घरों के अंदर व बाहर जमा पानी को नष्ट करने के बारे में बताया। कई जगह फॉगिंग भी कराई गई।

यह है डेंगू का हाल

- 41 नए मरीजों में डेंगू की पुष्टि

- 69 मरीज बेस, एसटीएच व निजी अस्पताल में भर्ती

- 654 मरीजों में अब तक हो चुकी है डेंगू की पुष्टि

- 585 मरीजों को इलाज के बाद किया जा चुका है डिस्चार्ज

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Posted By: Skand Shukla

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