जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : नजूल भूमि पर जिसे जहां मौका मिला, कब्जा कर मकान खड़ा कर दिया। कालोनियां तक काट दीं। नदी को भी नहीं छोड़ा। शैलजा फार्म के पास से गुजरने वाली नदी पाटकर जमीन कब्जा ली। प्रशासन और नगर निगम मौन साधे रहा। हैरानी यह कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नदी, नाले व तालाबों पर कब्जा होने दिया गया। ऐसे में अधिकारियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। गंगापुर रोड स्थित शैलजा फार्म की 10 एकड़ जमीन है। फार्म की उत्तर दिशा से कभी नदी गुजरती थी। वर्तमान में करीब पांच एकड़ भूमि पर पसरी नदी को पाटकर कब्जा कर लिया गया है। अब नदी का अता-पता ही नहीं हैै।

मामला वर्ष 2006 में तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर नपाई के दौरान सामने आया। शैलजा फार्म की कुछ भूमि पर अधिकारियों की मिलीभगत से 57 रजिस्ट्रियां कर दी गईं। हालांकि दाखिल नहीं हो पाई। रजिस्ट्री कराने वालों में ज्यादातर एक राष्ट्रीय पार्टी से जुड़े लोग हैं। निगम ने अपनी जमीन सुरक्षित करने की कोशिश तक नहीं की। अधिकारियों की मिलीभगत से एक के बाद नजूल भूमि पर कब्जा होता जा रहा हैै। लोगों के अनुसार अतिक्रमण के नाम पर सड़क के किनारे खोखे, फड़ तो निगम सख्ती कर हटा देता है मगर फार्म की जमीन की रजिस्ट्री तक करा चुके रसूखदार लोगों पर हाथ डालने से सकुचा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नदी, नालों व तालाबों से कब्जा हटाने के आदेश हैं मगर एक्शन लेने को तैयार नहीं है। मामले में नगर आयुक्त विशाल मिश्रा ने बताया कि दस्तोवजों की जांच के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।

Edited By: Prashant Mishra