गणेश पाडे, हल्द्वानी

सुण ले दगड़िया बात सुणी जा, बात सुणी जा तू मेरी, हृदय में नों छू तेरो आखों में अन्वार तेरी.। कुमाऊंनी गीत के ये स्वर कानों में सुनाई पड़ते ही लोक गायक स्व. पप्पू कार्की की अन्वार (छवि) आखों के सामने उभर आती है। एक हाथ में पॉकेट डायरी और दूसरे में माइक। हंसमुख चेहरा लेकर जब वह मंच पर उतरते तो न दर्शकों की तालिया थमती, न फरमाइश का सिलसिला। कुमाऊं की धरती के नायाब सितारे की मंगलवार को जयंती है। पिता के जयंती पर उनका बेटा दक्ष कार्की दगड़िया की थीम पर नया गीत लेकर आ रहा है।

गीत के जरिये दक्ष बादलों के माध्यम से अपने पिता को संदेश भेजना चाहता है। उसने पिता को रंगीलो और मायालू दगड़िया बताया है। नि:संदेह पप्पू दक्ष के लिए ही नहीं बल्कि अपने अनगिनत चाहने वालों के लिए दगड़िये (साथी) की तरह थे। आप उदासी में हों, खुशी में या फिर मस्ती के मूड में। पप्पू के गीत साथ-साथ चल पड़ते हैं। बहरहाल, अपने गीत के जरिये दक्ष कहता है, उड़ी उड़ी बादौ लिझै दे जुबाब, दगड़िया कैं मिलिये जरूर, रंगीलो दगड़िया कैं मिलिये जरूर, मायालू दगड़िया कैं मिलिये जरूर..।

दक्ष के साथ उनकी मा कविता कार्की व संदीप सोनू, मोहित रौतेला, नितेश बिष्ट ने गीत को आवाज दी है। संगीत नितेश बिष्ट का है। जबकि इसे मोहित रौतेला ने लिखा है। पीके इंटरनेशनल ग्रुप पर मंगलवार को गीत रिलीज होगा। इससे पहले मोहित ने तारा एक तारा गीत लिखा था। दक्ष की आवाज में इस गीत को यूट्यूब पर दो मिलियन से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

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संघर्ष के बलबूते मिली थी पहचान

पिथौरागढ़ जिले के सेलाबन (थल) गाव में 30 जून 1984 को जन्मे पप्पू कार्की ने 14 साल की उम्र में पहला गीत रिकॉर्ड कराया। विभिन्न शहरों में रोजगार के लिए हाथ-पाव मारे। 2010 में आई झम्म लागछी एलबम से उन्हें पहचान मिली। संघर्ष के बलबूते कम उम्र में ही उन्होंने अपनी पहचान कायम कर ली थी। पीके इंटरनेशनल नाम से हल्द्वानी में स्टूडियो खोला। कामयाबी की सीढि़या चढ़ते जा रहे थे कि 9 जून 2018 को नैनीताल जिले के गौनियारों में युवा महोत्सव से वापस लौटते समय सड़क हादसे में उनके जीवन का सफर थम गया। हादसे में दो अन्य लोगों की भी मौत हो गई थी।

Posted By: Jagran

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