विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

निठारी कांड में फांसी से बाल-बाल बचा कोली, आखिरकार फांसी से हुई मौत

Published: Fri, 18 Sep 2026 08:35 PM (IST)

Surendra Koli Suicide निठारी कांड में फांसी की सजा से बरी हुए आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाई।

  2. फांसी की सजा से बरी होने के बाद भी हुई आत्महत्या।

  3. दुकान हटने का डर आत्महत्या का संभावित कारण माना जा रहा।

मेहताब आलम, जागरण हरिद्वार। निठारी कांड में साल 2009 से 2017 के बीच सीबीआई की विशेष अदालतों ने सुरेंद्र कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को कई मामलों में मौत की सजा (फांसी) सुनाई थी। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ठोस सबूतों के अभाव में पंढेर और कोली को बरी कर दिया।

WhatsApp Image 2026-09-18 at 4.34.10 PM (1)

बाद में नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया, जिसके बाद कोली जेल से रिहा हो गया था। कुल मिलाकर पंढेर और कोली फांसी की सजा से बाल-बाल बचे। लेकिन कोली की मौत आखिरकार फांसी लगने से ही हुई।

यह मामला कुछ ही देर में इंटरनेट मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। किसी ने इसे कुदरत का इंसाफ बताया। जबकि बहुत से लोग यह मान रहे हैं कि कोली की किस्मत में फांसी से मौत लिखी हुई थी।

अलबत्ता, लोग ये सवाल भी उठा रहे हैं कि बच्चों के अपहरण, अप्राकृतिक कृत्य और उनका मांस भक्षण जैसी घिनौने आराेप लगने पर भी खुदकुशी नहीं करने वाले कोली के सामने ऐसी कौन सी मजबूरी रही कि उसने फांसी लगाकर जान दे दी।

देश भर में सड़कों पर उतरे थे लोग

दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव में पंढ़ेर की कोठी के पास नाले से कई बच्चों के कंकाल और अवशेष बरामद हुए थे। यह माना गया था कि व्यवसाय मनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली ने अपहरण कर बच्चों की हत्या की है।

दोनों पर बच्चों के साथ अमानवीय कृत्य और उनका मांस भक्षण जैसे आरोप भी लगे थे। इस घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और आरोपितों को फांसी की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतरे थे।

WhatsApp Image 2026-09-18 at 4.34.10 PM

दुकान हटने का डर तो नहीं

कोली ने 10 दिन पहले ही दो महीने का 14 हजार रुपये किराया देकर दुकान शुरू की थी। इस बीच कुंभ की तैयारियों के चलते आस-पास अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू हो गया।

ऐसा माना जा रहा है कि अतिक्रमण अभियान में दुकान हटने की टेंशन उसके दिमाग में घर कर गई। हालांकि, दुकान पूर्व में आंचल दुग्ध का आउटलेट रह चुकी है, इसलिए उसके हटने की संभावना नहीं थी।

यह भी पढ़ें- निठारी कांड से अल्मोड़ा तक और फिर हरिद्वार में मौत, कैसे हुआ सुरेंद्र कोली की कहानी का अंत?

यह भी पढ़ें- सुरेंद्र कोली हरिद्वार में बना सदाराम, वॉचमैन से चाय की दुकान तक का सफर... आधार और वोटर आईडी में अलग-अलग नाम