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सुरेंद्र कोली हरिद्वार में बना सदाराम, वॉचमैन से चाय की दुकान तक का सफर... आधार और वोटर आईडी में अलग-अलग नाम

Published: Fri, 18 Sep 2026 03:43 PM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 03:52 PM (IST)

Surendra Koli Suicide: निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में सदाराम नाम से पहचान बदलकर नाइट वॉचमैन और चाय की दुकान का काम किया।

HighLights

  1. सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में सदाराम नाम से पहचान बदलकर काम किया

  2. वह नाइट वॉचमैन और चाय की दुकान चलाकर गुजारा कर रहा था

  3. पुलिस को उसके पास से दो अलग-अलग आधार कार्ड मिले

जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Surendra Koli Suicide: देशभर में चर्चित निठारी कांड के आरोपित रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में पहचान छिपाकर करीब 15 दिन तक रोशनाबाद स्थित दीपगंगा सोसायटी में नाइट वॉचमैन का काम भी किया।

यहां उसने सभी को अपना नाम सदाराम बताया। नरेला, दिल्ली निवासी धर्मेंद्र कौशिक की मदद से उसने सप्तसरोवर क्षेत्र में चाय की दुकान शुरू की थी। कुंभ में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए वह कुछ कमाई की उम्मीद में दुकान चला रहा था।

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धर्मेंद्र कौशिक ने सिडकुल निवासी ठेकेदार जय कश्यप से कोली की बातचीत कराई थी। जय कश्यप का परिचय एक महिला अधिवक्ता ने कराया था। वहीं, पुलिस को यही पता चला है कि पूर्व जेल विजिटर अनिल शर्मा ने सात हजार रुपये महीने के किराये पर दुकान उपलब्ध कराई थी। 14 हजार रुपये सिक्योरिटी मनी भी अनिल शर्मा को दिए गए थे। 

आर्थिक तंगी को लेकर परेशान था कोली

बताया जा रहा है कि कोली आर्थिक तंगी को लेकर परेशान था। बच्चे के जन्मदिन पर उसे गिफ्ट दिलाने तक के पैसे नहीं थे। किसी व्यक्ति से फोन पर हुई बहस के बाद भी वह परेशान था। बुधवार शाम धर्मेंद्र कौशिक उससे आखिरी बार मिला था। धर्मेंद्र का दावा है कि उसने कोली को ढाई हजार रुपये दिए थे।

मिले दो पहचान पत्र

कोली के बैग से दो पहचान पत्र मिले हैं। एक में नाम सदाराम पुत्र शंकर, निवासी अल्मोड़ा और दूसरे आधार कार्ड में सुरेंद्र कोली पुत्र शंकर, निवासी नोएडा सेक्टर-31 दर्ज है। यहां उसने सभी को अपनी पहचान सदाराम के तौर पर बताई थी।

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सभी संबंधित लोगों का दावा है कि उन्हें उसके सुरेंद्र कोली होने की जानकारी नहीं थी। पुलिस सभी के बयान दर्ज कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। कोली के डायबिटीज से पीड़ित होने की बात भी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सदाराम और सुरेंद्र कोली की हकीकत आखिर किसे पता थी।