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हरिद्वार में श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह का दूसरा दिन, धामी बोले- सनातन संस्कृति का केंद्र है भारत माता मंदिर

Published: Thu, 05 Feb 2026 12:44 PM (IST)

हरिद्वार में भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की समाधि स्थली पर श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह ...और पढ़ें

श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह. Jagran

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जागरण संवाददाता, हरिद्वार। भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की समाधि स्थली पर श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह के दूसरे दिन धर्मसभा एवं संत सम्मेलन में विद्वान वक्ताओं ने कहा कि भारत की पहचान सनातन से है, सनातन में ही विश्व में सुख-शांति और कल्याण का मार्ग है। संत समाज सनातन की ध्वजवाहक है, आज भारत संतों के मार्गदर्शन से आगे बढ़ रहा है।

भारत माता मंदिर के निकट सप्तऋषि क्षेत्र में आयोजन स्थल पर दूसरे दिन के धर्मसभा एवं संत सम्मेलन का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल, विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, योगगुरु बाबा रामदेव, आचार्य प्रमोद कृष्णन समेत कई संतों ने संयुक्त रूप से किया।

भारत माता मंदिर-समन्वय सेवा ट्रस्ट एवं भारत माता जनहित ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज के सानिध्य में आयोजित धर्म सम्मेलन में संत-महात्माओं व धर्माचार्यों के जीवन-दर्शन, सनातन धर्म की समन्वय परंपरा तथा राष्ट्र-निर्माण पर मंथन हुआ।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सनातन धर्म मानव निर्मित नहीं, बल्कि शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित है, जो समय के साथ चलता है और कभी पराजित नहीं होता। भारत माता मंदिर भी सनातन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का कार्य कर रहा है।

स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि की मूर्ति स्थापना नई पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून की स्थापना की गई है।

युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण और बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान जैसे कार्य भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

सिंहस्थ कुंभ के लिए संतों को दिया आमंत्रण

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में शंकराचार्य की पद-प्रतिष्ठा किसी से छिपी नहीं है। स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज ने हरिद्वार में गंगा तट पर स्थित भारत माता मंदिर बनाया, जो देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। हमें अपने हिंदुत्व पर गर्व होना चाहिए, इसी से हमारा अस्तित्व है।

कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उम्मीद कर रहे हैं कि सभी संतों के आशीर्वाद से सनातन की यह धारा शाश्वत रूप में बहती रहे।वह अपनी ओर से, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अपना प्रतिनिधित्व देते हुए सभी को सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 में ससम्मान आने के लिए आमंत्रित करते हैं। उन्होंने संतों का आश्वासन दिया कि जो आप इशारा करेंगे, सरकार उस पर काम करेगी।

संतों के आशीर्वाद से मिली देश को नई ऊर्जा

जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि भारत में बीते 12 वर्षों में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है और आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। जल, थल और वायु मार्गों का तीव्र विकास हुआ है। संत समाज भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ करने और देश को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है।

संतों के आशीर्वाद से भारत में एक नई ऊर्जा आई है। सनातन संस्कृति में भेदभाव नहीं है, बल्कि एकता और मानव कल्याण को पोषित करने वाली है।

हमने संसार को राष्ट्रप्रेम की परिभाषा दी है और दुनिया को बताने का काम किया है कि विश्व की सबसे सभ्य सभ्यता और संस्कृति का क्षेत्र भारत ही रहा है। शांति व सद्भाव उत्पन्न करने में भारत का जो योगदान है, वह दुनिया में किसी और देश के पास नहीं है।

सनातन से है भारत की पहचान

हरिद्वार। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि मुझे कोई संदेह नहीं है, मैंने पहले बोला भी है और लिखा भी कि भारत की पहचान सनातन से है, इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती। भगवान शंकराचार्य केरल से निकले, पूरे भारत में पैदल घूमे, चार मठ स्थापित किए और चार सूत्र दिए हैं।

यही सनातन की पहचान है। जो “तत्त्वमसि”, “अहं ब्रह्मास्मि”, “प्रज्ञानं ब्रह्म”, “सर्वं खल्विदं ब्रह्म” है, यह मानव की दिव्यता का संकेत है। भारतीय संस्कृति का अनूठा योगदान मानवता के दिव्यकरण का संदेश देता है।

भारत ने आत्मा से मानव को परिभाषित किया है, जो मानवता की साझी विरासत है। हर देह में परमात्मा को देखो, उसे परमात्मा का मंदिर मानो। जिसने यह जान लिया कि परमात्मा सभी के शरीर में विद्यमान है, उसे परमज्ञान प्राप्त हो गया है।

हमारे ही पक्ष में आएगा मथुरा-काशी का निर्णय

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यह हिंदुओं की शताब्दी है। हिंदू व भारत विश्व में परम वैभव पर पहुंचेंगे और विश्व में सुख-शांति का मार्ग बताने का अपना दायित्व पूरा करेंगे।

भारत माता मंदिर में स्वामी सत्यमित्रानंद और अन्य संतों के पुरुषार्थ व आशीर्वाद से हमने राम जन्मभूमि प्राप्त की, जहां आज भव्य राम मंदिर बन चुका है। भगवान कृष्ण की जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ का मामला अभी न्यायालय में है, लेकिन उम्मीद है कुछ वर्षों में इस पर निर्णय हमारे पक्ष में ही आएगा।

तब हम सभी को निमंत्रण देने की स्थिति में होंगे और कह सकेंगे कि आएं! यहां का भूमि पूजन करते हैं।

उन्होंने कहा कि देश और धर्म का नाता है, इसलिए स्वामी सत्यमित्रानंद ने ऐसे भारत माता मंदिर की स्थापना की, जिसमें भारत के सभी विराट पुत्र-पुत्रियों का दर्शन हो। कहा कि मंदिरों में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाना सर्वथा उचित है। हमें मंदिर और पर्यटन स्थलों के अंतर को समझना होगा।

अध्यात्मिक चेतना की धुरी है भारत की धरती

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने अपने एक स्मरण में बताया था कि जब भारत माता का मंदिर बनाया जा रहा था, तब वे मंदिर के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को निमंत्रण देने गए।

बार-बार आग्रह करने पर भी इंदिरा गांधी ने मना कर दिया। तो फिर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने प्रभु का नाम लिया और इंदिरा गांधी से कहा कि आप भारत की प्रधानमंत्री हैं और वह भारत माता का मंदिर बना रहे हैं। सारे देश और दुनिया के लिए एक स्थान पर भारत भूमि के पवित्र स्थलों को देखा जा सके, स्मरण किया जा सके, इसलिए आप आएं।

फिर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने इंदिरा गांधी के उत्तर की प्रतीक्षा नहीं की और कहा कि उन्हें विश्वास है कि आप आएंगी। और अगर आप नहीं आईं तो वे संन्यास छोड़ देंगे। फिर दो दिन बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से संदेश आया कि कार्यक्रम भेजिए।

तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आईं और संघ के सरसंघचालक भी आए। उन्होंने कहा कि इस पूरे विश्व में भारत एक अकेला देश है, भारत की धरती को देवत्व प्राप्त है। भारत का व्यक्ति जो आध्यात्मिक है, वह मानता है कि अध्यात्म का जो भाव है, दीक्षा है, वह इसी धरती से प्राप्त हुई है।

राष्ट्रधर्म और सनातन सर्वोपरि

हरिद्वार। योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत माता का मंदिर प्रतीक है इस बात का कि सनातन धर्म को सर्वोपरि मानते हुए राष्ट्रधर्म को भी सर्वोपरि मानना है और इस पुण्य धरा पर बसने वाले सभी को एक समान दृष्टि से देखना है।

आज भारत को जरूरत है कि हम एक ईश्वर की संतान, एक पूर्वज की संतान, एक भारत माता की संतान हैं। इसलिए राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मानकर भारत को इतनी ऊंचाई पर ले जाओ कि दुनिया देखती रहे।

आज लोग खुश हो जाते हैं कि ट्रंप ने ये घोषणा कर दी, पुतिन ने ये कर दी, शी जिनपिंग ने ये कर दी, किम जोंग ने ये कर दी, लेकिन हम वह दिन देखना चाहते हैं जब भारत जिधर चाहेगा, दुनिया उधर चलेगी। हम एक रुपया दें तो 90-100 डालर हमें वापस मिलें। आर्थिक दृष्टि से भारत शक्तिशाली हो।

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