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24 देशों में संस्कृत का प्रचार-प्रसार कर रही संस्कृत भारती

संस्कृत भारती उत्तरांचल का पांच दिवसीय आनलाइन कार्यकत्र्ता अभ्यास वर्ग के उद्घाटन पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख नंदकुमार ने संस्कृत भारती के विभिन्न आयामों पर चर्चा की।

By JagranEdited By: Published: Fri, 24 Sep 2021 08:04 PM (IST)Updated: Fri, 24 Sep 2021 08:04 PM (IST)
24 देशों में संस्कृत का प्रचार-प्रसार कर रही संस्कृत भारती

जागरण संवाददाता, हरिद्वार: संस्कृत भारती उत्तरांचल का पांच दिवसीय आनलाइन कार्यकत्र्ता अभ्यास वर्ग के उद्घाटन पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख नंदकुमार ने संस्कृत भारती के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आज संस्कृत भारती न केवल भारत, बल्कि विश्व के 24 देशों में अपने आयामों के माध्यम से संस्कृत के प्रचार-प्रसार में लगी है। संस्कृत भारती के आयामों में से प्रमुख सरल संस्कृत संभाषण शिविर का जिक्र करते हुए कहा कि संभाषण शिविरों के माध्यम से दुनिया में लाखों लोग परस्पर संस्कृत में वार्तालाप कर रहे हैं।

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पत्राचार के जरिये संस्कृत आयाम में आज बड़ी संख्या में लोग अपना पंजीकरण कराकर आनलाइन कक्षाओं से संस्कृत का प्रशिक्षण ले रहे हैं। बच्चों में भारतीय संस्कृति और संस्कार बना रहे, इसके लिए संस्कृत भारती की ओर से पूरे देश में नियमित रूप से हजारों बाल संस्कार केंद्र चलाए जा रहे हैं। गीता शिक्षण केंद्रों के माध्यम से श्रीमद्भागवत गीता को सरल रूप में पढ़ने का अभ्यास कराकर लाखों-करोड़ों लोग घर बैठे गीता का पाठ कर रहे हैं। 'संस्कृत गृहम' संस्कृत भारती का एक अनूठा आयाम है। इसके कारण आज संपूर्ण देश और दुनिया में संगठन के प्रयासों से ऐसे लाखों घर हैं, जिसमें घर के सभी सदस्य परस्पर संस्कृत में व्यवहार कर रहे हैं। विद्वत परिषद के माध्यम से विभिन्न विषयों के विद्वानों को संगठन से जोड़कर विभिन्न विषयों पर व्याख्यान माला आयोजित हो रही है, इसका सीधा लाभ छात्रों को मिल रहा है। कार्यक्रम में संस्कृत भारती के प्रांत संगठन मंत्री योगेश कुमार, विद्यार्थी क्षेत्र संयोजक डा. प्रेम शास्त्री, प्रांत अध्यक्ष जानकी त्रिपाठी, प्रकाश पंत, हरीश गुरुरानी, भगवती प्रसाद देवराड़ी, प्रो. दिनेश शास्त्री, डा. अरविद नारायण मिश्र आदि कार्यकत्र्ता उपस्थित रहे। संचालन संस्कृत भारती के प्रांत शिक्षण प्रमुख गिरीश तिवारी और सह प्रशिक्षण प्रमुख डा. राघव झा ने किया।


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