जागरण संवाददाता, रुड़की: शहर के लगभग दो किमी हिस्से में पेयजल की मेन राइजिग लाइन डालने की जरूरत है। जबकि, अमृत योजना के तहत केवल साढ़े पांच सौ मीटर क्षेत्र में ही नई राइजिग लाइन डालने की योजना है। नई राइजिग लाइन केवल रामनगर में ही डाली जाएगी। जबकि, सिविल लाइंस क्षेत्र में भी आएदिन राइजिग लाइन क्षतिग्रस्त होती रहती है। इससे पानी की बर्बादी होने के साथ ही उपभोक्ताओं को पेयजल संकट से भी जूझना पड़ रहा है।

एशियन डेवलपमेंट बैंक की ओर से पेयजल प्रोजेक्ट के तहत शहर में नई पेयजल लाइन डालने के साथ ही आठ नए ट्यूबवेल भी लगाए गए हैं। लेकिन, वर्षों पुरानी पेयजल की मेन राइजिग लाइन को नहीं बदला गया। राइजिग वह लाइन होती है, जिसके माध्यम से ट्यूबवेल से पानी ओवरहेड टैंक में जाता है। उधर, पेयजल का नया सिस्टम चालू होने के बाद जर्जर हो चुकी राइजिग लाइन पानी का दबाव नहीं सह पा रही है। इसके चलते आएदिन सिविल लाइंस, गांधी वाटिका, रामनगर और आवास विकास में राइजिग लाइन क्षतिग्रस्त हो रही है। रामनगर और सिविल लाइंस में लाइनों के टूटने की अधिक समस्या रहती है। ऐसे में पीने के पानी की बर्बादी हो रही है। वहीं स्थानीय उपभोक्ताओं को भी पानी के लो प्रेशर और किल्लत से जूझना पड़ता है। रामनगर एवं सिविल लाइंस क्षेत्र के लोग राइजिग लाइनों को बदलने की मांग को लेकर कई बार विरोध-प्रदर्शन भी कर चुके हैं। उधर, जल संस्थान की ओर से भी बीते वर्ष शहर में नई राइजिग डालने के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। लेकिन, अभी तक इसे लेकर स्वीकृति नहीं मिली है। वहीं अमृत योजना के तहत रामनगर क्षेत्र में करीब 27 लाख रुपये की लागत से साढ़े पांच सौ मीटर में राइजिग लाइन डालने की योजना है। जबकि, सिविल लाइंस में अभी यह समस्या बरकरार रहने वाली है। जल संस्थान के सहायक अभियंता राजेश कुमार निर्वाल के अनुसार शहर में पेयजल की नई राइजिग लाइन डालने को लेकर प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेजा गया है। लेकिन, अभी इसे स्वीकृति नहीं मिली है। उनके अनुसार अभी अमृत योजना के तहत केवल रामनगर में ही राइजिग लाइन डाली जाएगी।

Posted By: Jagran

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