जागरण संवाददाता, हरिद्वार।  Haridwar Kumbh Mela 2021 श्री पंचायती उदासीन नया अखाड़ा की पेशवाई शान-ओ-शौकत के साथ छावनी में प्रवेश किया। उत्तराखंड पुलिस के बैंड ने लोक गीत और देशभक्ति गीतों की धुनों से पेशवाई का स्वागत किया। कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत और कुंभ मेला आइजी संजय गुंज्याल ने देश रक्षक तिराहे पर पेशवाई का स्वागत किया और संतों का आशीर्वाद लिया।

जगजीतपुर कनखल से शुरू हुई पेशवाई बूढ़ी माता, सती कुंड, देश रक्षक, दादू बाग, हनुमानगढ़ी, कनखल थाना, सर्राफा बाजार,चौक बाजा, पहाड़ी बाजार, बंगाली मोड़ होते हुए अखाड़े की छावनी में पहुंचकर समाप्त हुई। पेशवाई को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया। पेशवाई का अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, महामंत्री हरि गिरि, महंत रविद्र पुरी, परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, महंत जसविदर सिंह शास्त्री आदि ने स्वागत किया। पेशवाई में सबसे आगे हाथी-घोड़े चल रहे थे। साथ-साथ अखाड़े की ध्वज पताका चल रही थी। 

पेशवाई में उदासीन संप्रदाय के संस्थापक भगवान श्री चंद्राचार्य महाराज और श्री गुरु संगत साहिब का विग्रह चल रहा था। अखाड़ा की पेशवाई का नेतृत्व अखाड़े के मुखिया श्रीमहंत भगत राम, अध्यक्ष महंत धुनी दास, सचिव महंत जगतार मुनि, मुखिया महंत मंगलदास कोठारी, महंत वेद मुनि, मुखिया महंत, सुरजीत मुनि आदि कर रहे थे। पेशवाई में अखाड़ा के उप सचिव महंत त्रिवेणी दास, महामंडलेश्वर स्वामी सुरेंद्र मुनि, महामंडलेश्वर राम प्रकाश शास्त्री, महामंडलेश्वर शांतानंद महाराज जालंधर वाले, महामंडलेश्वर मोहनदास खिचड़ी वाले आदि शामिल थे। 

पेशवाई के आरंभ स्थल पर पहुंचकर अपर मेला अधिकारी सरदार हरवीर सिंह ने संतों का पुष्प माला पहनाकर स्वागत किया। दही और पेड़े का भोग लगाकर पेशवाई की शुरुआत हुई। अखाड़ा के मुखिया महंत भगत राम ने बताया कि अखाड़े की स्थापना 1738 में महंत मनोहर दास डेरा पटियाला ने की थी। अखाड़े का इतिहास स्वर्णिम रहा है। अखाड़े ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता तथा आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अखाड़े के संतों का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि अखाड़े के महंत श्री ब्रह्मादास ने 1918 में कटार पुर में गोवध के लिए खुले बूचड़खाने को बंद कराने के लिए संघर्ष किया और अपना बलिदान दिया। 

उन्हें अंग्रेजों ने इस आंदोलन के कारण फांसी की सजा दी थी और कनखल तथा कटारपुर और आसपास के गांव के कई लोगों को काले पानी की सजा दी गई थी और इस आंदोलन में कई लोग शहीद हुए थे। अखाड़ा के अध्यक्ष महंत मुनि दास महाराज ने कहा कि अखाड़ा की पेशवाई भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। अखाड़े ने हमेशा राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है। मुखिया महंत मंगल दास महाराज ने कहा कि अखाड़ा ने सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए हमेशा कार्य किया है। इस अवसर पर कनखल राम लीला कमेटी के अध्यक्ष शैलेंद्र त्रिपाठी, पार्षद नितिन माणा आदि ने पेशवाई का स्वागत किया।

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