हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर: चढ़ावे में पारदर्शिता के लिए बनाई समिति, पुजारी पहनेंगे बिना जेब के वस्त्र
हरिद्वार के सिद्धपीठ मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने दान व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सात सदस्यीय निगरानी समिति बनाई है।

हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ मनसा देवी मंदिर।
HighLights
दान व्यवस्था में पारदर्शिता हेतु सात सदस्यीय समिति गठित।
पुजारियों को बिना जेब वाले वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा।
दान में हेराफेरी पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जागरण संवाददाता, हरिद्वार। अयोध्या और बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है।
मंदिर ट्रस्ट ने दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सात सदस्यीय निगरानी समिति का गठन किया है। यह समिति दान और चढ़ावे पर निगरानी रखेगी।
श्रद्धालुओं को दान की रसीद दी जाएगी। प्रतिदिन चढ़ावे और दान का हिसाब होगा। साथ ही तय किया गया कि मंदिर के पुजारी बिना जेब वाले वस्त्र पहनेंगे।
साथ ही, चेतावनी दी गई कि चढ़ावे या दानराशि में किसी भी प्रकार की हेराफेरी करने वाला व्यक्ति सेवा से निष्कासित होने के साथ उसके विरुद्ध एफआइआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी महाराज ने सोमवार को मंदिर परिसर में हुई बैठक में यह निर्ण लिया।
उन्होंने कहा कि मनसा देवी मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां दान व्यवस्था में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। मंदिर प्रशासन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत हो।
उन्होंने बताया कि नवगठित समिति दान एवं चढ़ावे की संपूर्ण प्रक्रिया पर नियमित निगरानी रखेगी। सभी पुजारियों को बिना जेब वाले वस्त्र पहनने होंगे, प्रत्येक श्रद्धालु को उसके दान की अधिकृत रसीद उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रतिदिन प्राप्त होने वाली दानराशि का विधिवत लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। इसके अलावा मंदिर में चढ़ाए गए नारियल, प्रसाद और फूलों का दोबारा उपयोग भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी ने कहा कि देश के विभिन्न मंदिरों में चढ़ावे से जुड़े विवाद सामने आने के बाद यह आवश्यक हो गया था कि मनसा देवी मंदिर में ऐसी व्यवस्था लागू की जाए, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो जाए।
उन्होंने दो टूक कहा कि यदि कोई पुजारी अथवा कर्मचारी दानराशि का दुरुपयोग या हेराफेरी करता पाया गया तो उसके विरुद्ध तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उन्होंने हाल के दिनों में प्रमुख मंदिरों में सामने आए दान एवं चढ़ावा संबंधी विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
किसी भी व्यक्ति को आरोप सिद्ध होने से पहले दोषी नहीं माना जाना चाहिए और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।
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