कांवड़ की ऊंचाई को लेकर शिवभक्तों में भ्रम, हरिद्वार में छह और मेरठ में 10 फीट का नियम!
श्रावण मास कांवड़ यात्रा से पहले कांवड़ की ऊंचाई को लेकर विभिन्न राज्यों की अलग-अलग गाइडलाइन से शिवभक्तों में भ्रम है।

आगामी 30 जुलाई से शुरू होने जा रहा है श्रावण मास कांवड़ मेला. File

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, हरिद्वार। श्रावण मास कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई को लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा की अलग-अलग गाइडलाइन ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
हालांकि, हरिद्वार में हमेशा की तरह इस बार भी पैदल कांवड़ छह फीट और झांकी वाली कांवड़ की ऊंचाई 10 फीट तय की गई है। मगर दूसरे राज्यों में अधिक ऊंचाई की छूट मिलने से हरिद्वार में पुलिस को कांवड़ यात्रियों से नोक-झोंक का सामना करना पड़ सकता है।
30 जुलाई से शुरू होगा कांवड़ मेला
श्रावण मास कांवड़ मेला 30 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। कांवड़ यात्रा सुरक्षित और सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस इन दिनों होमवर्क में जुटी है। यातायात प्लान को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है। इस बीच कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई को लेकर पुलिस ने गाइडलाइन जारी कर दी है। जिसमें पैदल कांवड़ के लिए छह फीट और झांकी वाली कांवड़ के लिए 10 फीट की ऊंचाई तय की गई है।
दरअसल, अधिक ऊंची कांवड़ बिजली की हाईटेंशन लाइनों, पुलों, फ्लाईओवर और अन्य संरचनाओं के लिए खतरा बन सकती हैं। हर साल ऊंची कांवड़ के कारण दुर्घटना और जाम की समस्याएं भी सामने आती हैं।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों, विशेष रूप से मेरठ क्षेत्र में, कांवड़ की ऊंचाई को लेकर अलग मानक सामने आए हैं। जहां 10 से 12 फीट तक की कांवड़ को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसी तरह दिल्ली और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में भी अलग-अलग नियम लागू होने की जानकारियां मिल रही हैं।
अलग-अलग व्यवस्थाओं ने श्रद्धालुओं को असमंजस में डाल दिया है। युवा कांवड़ यात्रियों का एक बड़ा वर्ग ऐसा होता है, जो अधिक से अधिक ऊंचाई वाली कांवड़ पसंद करता है। ऐसे कांवड़ यात्री दूसरे राज्यों के नियमों का हवाला देते हुए पुलिस से उलझ सकते हैं।
वहीं, यदि कोई श्रद्धालु दूसरे राज्य के नियमों के अनुसार अधिक ऊंचाई की कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंचता है, तो उसे उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। करोड़ों की संख्या में कांवड़ की ऊंचाई कम कराना पुलिस के लिए भी संभव नहीं है। कुल मिलाकर हरिद्वार से लेकर दिल्ली, हरियाणा तक समान नियमों की जरूरत महसूस की जा रही है।
मिलकर तय करने चाहिए नियम
श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि सभी संबंधित राज्य आपसी समन्वय के साथ एक समान मानक तय कर दें तो कांवड़ यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर होगी और यात्रा अधिक सुचारू रूप से संचालित की जा सकेगी।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संबंधित राज्य मिलकर इस मुद्दे पर एकरूप गाइडलाइन जारी करते हैं या फिर कांवड़ यात्रियों को अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग नियमों के बीच ही अपनी यात्रा पूरी करनी होगी।
हरिद्वार में हमेशा से ही पैदल कांवड़ की ऊंचाई छह फीट और झांकी की ऊंचाई 10 फीट तय रहती है। इस बार भी वही नियम लागू कराया जाएगा। 17 जुलाई को हरिद्वार में अंतरराज्यीय बैठक होनी है। उस बैठक में कांवड़ की ऊंचाई को लेकर एक बार फिर से चर्चा की जाएगी। आपसी समन्वय बनाते हुए नियमों का पालन कराया जाएगा। - नवनीत सिंह, एसएसपी हरिद्वार
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