जागरण संवाददाता, रुड़की : लीज संपत्ति के नवीनीकरण के नाम पर 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में घिरे महापौर प्रकरण के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने तहसीलदार को निर्देश दिए है कि लीज नवीनीकरण के लिए जो फाइल दी गई है उसको सील कर सुरक्षित किया जाए। उसकी डमी फाइल को तैयार किया जाए। ताकि कागजों से किसी तरह की छेड़छाड़ ना हो सके।

पिछले दिनों मोहल्ला राजपुतान रुड़की निवासी सुबोध कुमार ने सिविल लाइंस कोतवाली में दी तहरीर में बताया था कि मथुरादास एवं ओमप्रकाश के नाम पर तीन लीज संपत्ति तत्कालीन नगर पालिका की ओर से की गई थी। नियमानुसार इस संपत्ति का तीस साल बाद नवीनीकरण कराया जाना है। लंबे समय तक लीज नवीनीकरण के लिए बोर्ड बैठक नहीं बुलाई गई और जो बैठक बुलाई भी गई, उसमें उनका प्रस्ताव सम्मिलित नहीं किया गया। जिसके चलते उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। हाईकोर्ट ने 13 दिसंबर 2021 को दो माह के अंदर नगर निगम की बैठक बुलाकर इसका निस्तारण करने के आदेश दिए थे। नगर निगम अधिनियम में बोर्ड की बैठक बुलाने का अधिकार महापौर को प्राप्त है। इसलिए 20 दिसंबर को वे महापौर से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान महापौर ने लीज नवीनीकरण के एवज में 25 लाख रुपये की मांग की थी। इसके बाद पांच जनवरी को एक नंबर से काल आई। आरोप है कि फोन पर भी उनसे रुपयों की मांग की गई। इसके बाद आठ जनवरी को हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में मात्र औपचारिकता दर्शाने के लिए बोर्ड की बैठक बुलाई गई, लेकिन लीज नवीनीकरण के प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया। ताकि रुपये वसूलने के लिए दबाव बनाया जा सके। सुबोध गुप्ता ने तहरीर में पिछले दिनों इंटरनेट मीडिया पर वायरल आडियो का जिक्र करते हुए उसमें सुनाई दे रही हर बात का जिक्र किया है। जिसमें संपत्ति को लेकर लेनदेन की बात की जा रही है। शिकायत पर सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस ने 23 जनवरी को तहरीर के आधार महापौर गौरव गोयल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। अब शिकायतकत्र्ता सुबोध गुप्ता ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंशुल सिंह को पत्र सौंपकर महापौर की ओर से संबंधित फाइल को नष्ट करने की आशंका जताई है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि शिकायतकत्र्ता की ओर से पत्र सौंपा गया है। जिस पर तहसीलदार को फाइल की पेजिंग और स्केनिंग कर एक डमी फाइल तैयार करने और मूल फाइल को सील कर सुरक्षित रखे जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इस पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराए जाने के भी निर्देश दिए हैं। ताकि इस दौरान फाइल में किसी प्रकार की कोई छेड़छाड़ न की जा सके।

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