विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आईआईटी रुड़की की शोध ने बढ़ाई चिंता, भारत के जिलों में बाढ़ और सूखे का दोहरा खतरा बढ़ा

By Rena Edited By: Abhijit Pathak
Published: Fri, 16 Oct 2026 03:26 PM (IST)Updated: Fri, 16 Oct 2026 03:29 PM (IST)

आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया है कि भारत के कई जिलों में बाढ़ और सूखे दोनों का खतरा एक साथ बढ़ रहा है।

एआई जनरेटेड तस्वीर।

एआई जनरेटेड तस्वीर।

HighLights

  1. आईआईटी रुड़की ने बाढ़-सूखे पर अध्ययन किया।

  2. देश के कई जिलों में दोनों आपदाओं का खतरा बढ़ा।

  3. आपदा प्रबंधन में एकीकृत दृष्टिकोण जरूरी।

जागरण संवाददाता, रुड़की। IIT रुड़की के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में सामने आया है कि देश के कई हिस्सों में बाढ़ और सूखा इन दोनों आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी है। पूर्वी और उत्तरी भारत में ऐसे जिलों की संख्या बढ़ रही है, जहां दोनों आपदाओं का खतरा एक साथ मौजूद है।

संस्थान के शोधकर्ताओं ने 591 जिलों का अध्ययन किया। जिसके बाद शोधकर्ताओं ने आपदा प्रबंधन की रणनीति में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया है। भारत में बाढ़ और सूखे जैसी विपरीत प्राकृतिक आपदाओं का खतरा अब कई जिलों में एक साथ बढ़ रहा है। यह बात IIT रुड़की के शोधकर्ताओं की ओर से किए गए शोध के जरिए प्रकाश में आई है।

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले संस्थान के प्रोफेसर मोहित प्रकाश मोहंती के अनुसार बाढ़ और सूखे को अक्सर अलग-अलग आपदाओं के रूप में देखा जाता है, जबकि इनका असर एक ही सामाजिक और भौतिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। दोनों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन की योजनाओं में एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

Untitled design (2)

उनकी टीम ने वर्ष 2001 और 2011 के आंकड़ों के आधार पर भारत के 591 जिलों का विश्लेषण किया। जिसमें जिला स्तर पर उपलब्ध नये, राष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत सामाजिक-आर्थिक, जनसांख्यिकीय और बुनियादी ढांचे संबंधी आंकड़ों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने बाढ़ और सूखे का अलग-अलग आकलन करने के बजाय दोनों को एक साथ लेकर बहु-आपदा संवेदनशीलता का अध्ययन किया।

अध्ययन के अनुसार 2011 तक देश के 5वें हिस्से से अधिक जिले बाढ़ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में पहुंच चुके थे। वहीं लगभग पांचवें हिस्से के जिलों में सूखे के प्रति उच्च संवेदनशीलता पाई गई। इसके अलावा दस में से एक से अधिक जिले बहु-आपदा संवेदनशीलता सूचकांक के उच्च स्तर पर पाए गए। यानी इन जिलों में बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं से निपटने की चुनौतियां एक साथ मौजूद हैं।

प्रोफेसर मोहंती ने बताया कि शोध में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड के कई जिलों में दोनों आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ने की बात सामने आई। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल ऐसे क्षेत्रों में प्रमुखता से शामिल रहे हैं जहां बाढ़ और सूखे दोनों का खतरा चिंता का विषय है। यह शोध नेचर पोर्टफोलियो की शोध पत्रिका एनपीजे नेचुरल हजाडर्स में प्रकाशित हुआ है। वहीं शोध दल में आइआइटी रुड़की की प्रियंका त्रिपाठी, देव आनंद ठाकुर और विट्ठल हरि शामिल हैं।

आपदा से निपटने को जिला स्तर पर योजना बनाने की जरुरत

अध्ययन से मिली जानकारियों के अनुसार केवल राज्य स्तर पर आपदा के खतरे का आकलन करना पर्याप्त नहीं है। एक ही राज्य के अलग-अलग जिलों की परिस्थितियां और समस्याएं अलग हो सकती हैं। ऐसे में जिला स्तर पर संवेदनशीलता की पहचान करके राहत, बचाव और आपदा प्रबंधन की योजनाएं तैयार करना अधिक प्रभावी हो सकता है।