तो क्या एलोपैथिक दवा लिखेंगे होम्योपैथी डॉक्टर? महाराष्ट्र सरकार के फैसले का उत्तराखंड में विरोध
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहा है जिसमें होम्योपैथी डॉक्टरों को एक साल का ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, रुड़की। महाराष्ट्र सरकार के एक फैसले का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने विरोध किया है। साथ ही सरकार को उस फैसले को वापस लेने की मांग की गइर् है जिसमें होम्योपैथी चिकित्सक को एलोपैथिक दवा लिखने के लिए अनुमति दी जा रही है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रुड़की के अध्यक्ष डॉ. संजीव गर्ग एवं पदाधिकारी डॉ. पारित अग्रवाल ने संयुक्त ने रूप से कहा कि पिछले दिनों महाराष्ट्र सरकार ने एक फैसला लिया है जिसके तहत होम्योपैथी (बीएचएमएस) के डॉक्टर यदि 1 साल का मॉर्डन फार्मेसिकल कोर्स कर लेते हैं, तो उन्हें एलोपैथिक (आधुनिक) दवाएं लिखने और एलोपैथिक डॉक्टरों की संस्था (एमएमसी ) में रजिस्टर होने की अनुमति दी जा रही है।
रीजों की सेहत के साथ खिलवाड़
पूरे देश में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) इसका विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मरीजों की सुरक्षा से समझौता है। 5-6 साल की गहन पढ़ाई और ट्रेनिंग करने वाले एमबीबीएस डॉक्टरों के मुकाबले, 1 साल का पार्ट-टाइम कोर्स करके एलोपैथी की भारी और गंभीर दवाएं लिखना मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो सकता है।
इसको लेकर पूर्व में भी न्यायालय विभिन्न आदेश दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब देश में और ग्रामीण इलाकों में भी पर्याप्त मात्रा में एमबीबीएस डॉक्टर उपलब्ध हैं, इसलिए इस तरह की छूट देने की जरूरत नहीं है।
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