-आंखों में जलन, खुजली और हो सकती सूजन

संवाद सहयोगी, रुड़की: होली को अभी एक दिन शेष है, लेकिन शहर से देहात तक होली शुरू हो चुकी है। लोगों में होली का जबरदस्त उत्साह है। लोग सामुहिक रुप से होली मिलन कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। हालांकि इन कार्यक्रमों में अभी फूलों की होली ज्यादा नजर आ रही है। सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय कंसल का कहना है कि होली मौज मस्ती का त्योहार है। इस त्योहार पर केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल न करें। इसका बुरा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। सबसे ज्यादा आंखों, त्वचा और बालों पर इसका बुरा असर पड़ता है। गुलाल से ही होली खेलें। गुलाल भी ज्यादा गहरे रंग का न लें। गहरे रंगों में ज्यादा खतरनाक केमिकल होने की आशंका रहती है। इनमें ऑक्सीडाइड होता है। जो त्वचा के संपर्क में आकर त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। मौसम में अभी ठंडक है। इसलिए गीले रंगों या फिर पानी न डालें।

इन बातों का रखे ध्यान

-बेहद हल्के रंग का गुलाल लें। गहरे रंग में केमिकल मिक्स होता है।

-गुलाल को हाथ पर लेकर चेक करें, यदि वह पाउडर जैसा तो लें, यदि उसमें जरा खुरदरापन लगता है तो उसे न लें।

-पानी में घोलने वाले रंग में यदि कोई तीखी गंध आ रही है तो वह रंग न लें। वह केमिकल युक्त हो सकता है।

-संभव हो तो पानी वाले रंगों को प्राकृतिक रुप से तैयार करें।

-गुब्बारों का इस्तेमाल न करें। पानी से भरे गुब्बारे चोट पहुंचा सकते हैं।

-बिजली की लाइनों के पास बच्चों को पिचकारी न चलाने दें।

Edited By: Jagran