सांसद पप्पू यादव के साधु वेश में प्रदर्शन पर हरिद्वार संत समाज में भारी रोष, करेंगे मानहानि का केस
सांसद पप्पू यादव द्वारा साधु वेश में प्रदर्शन करने पर हरिद्वार के संत समाज में गहरा आक्रोश है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, हरिद्वार। संसद परिसर के बाहर सांसद पप्पू यादव द्वारा साधु का वेश धारण कर अयोध्या के चंदा चोरी प्रकरण को लेकर किए गए प्रदर्शन पर हरिद्वार में संत समाज में आक्रोश है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और विभिन्न अखाड़ों के संतों ने इसे साधु-संतों की गरिमा का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। संतों ने चेतावनी दी कि यदि सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई तो देशव्यापी विरोध अभियान चलाया जाएगा और मानहानि का मुकदमा भी दायर किया जाएगा।
साधु-संतों की छवि धूमिल करने का प्रयास
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज (निरंजनी) ने कहा कि परिषद सांसद पप्पू यादव के इस कृत्य की घोर निंदा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए साधु-संतों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे संत समाज कभी सफल नहीं होने देगा।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि संत समाज सांसद पप्पू यादव के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही बिहार में उनके संसदीय क्षेत्र तक जाकर संत समाज लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगा और जनता को इस पूरे घटनाक्रम से अवगत कराएगा।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति विशेष के आरोपों या विवादों के आधार पर पूरे संत समाज का अपमान करना उचित नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से धार्मिक प्रतीकों और संत परंपरा का सम्मान करने की अपील करते हुए कहा कि आस्था का उपहास लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी विपरीत है। महामंडलेश्वर संतोषी माता ने कहा कि अयोध्या के चंदा चोरी प्रकरण से संत समाज पहले ही आहत है।
इस मामले से संपूर्ण संत समाज का कोई संबंध नहीं है, ऐसे में पूरे साधु समाज को कटघरे में खड़ा करना या साधु का वेश धारण कर उसका उपहास उड़ाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि संसद जैसे लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच के बाहर इस प्रकार का प्रदर्शन करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। संत समाज इसका पुरजोर विरोध करता है और ऐसे कृत्यों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।
