यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 03, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सीएम धामी ने राजा विजय सिंह स्मारक स्थल पहुंचकर दी श्रद्धांजलि, कहा- देश और दुनिया में राजा की वीरता का बजा डंका
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कुंजा बहादुरपुर गांव में राजा विजय सिंह स्मारक स्थल पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। तीन ...और पढ़ें

संवाद सूत्र, भगवानपुर : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शहीद राजा विजय सिंह की वीरता के किस्से देश ही नहीं वरन विदेश में गाए और सुने जाते हैं। उन्होंने शहादत दे दी। लेकिन, अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार नहीं की। सीएम ने कहा कि राजा विजय सिंह के नाम से गांव में बने इंटर कालेज को उच्चीकृत कर कृषि महाविद्यालय बनाया जाएगा।
रविवार को कुंजा बहादुरपुर गांव में राजा विजय सिंह स्मारक स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। प्रदेश की औद्योगिक इकाईयों में स्थानीय निवासियों को 70 फीसद रोजगार दिया जा रहा है। उद्योगों के लिए एक अच्छी नीति तैयार की जा रही है। जल्द गन्ना मूल्य भी घोषित होगा। धान की खरीद शुरू कर दी गई है।
विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने कहा कि कुंजा गांव का गौरवमयी इतिहास है। इस गांव ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने शहीद स्मारक को पर्यटन स्थल बनाने व आजादी के लिए सन 1824 में राजा विजय सिंह और उनके सेनापति कल्याण सिंह के नेतृत्व में की गई क्रांति को भी मान्यता देने की मांग की। उत्तर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अशोक कटारिया ने कहा कि कुंजा बहादुरपुर गांव के बारे में उन्होंने काफी कुछ सुना था। आज शहीदों की इस भूमि पर आकर उनको गर्व महसूस हो रहा है। झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल ने कहा कि सरकार इस बार गन्ने का दाम बढ़ाने का काम करें। साथ ही स्मारक का सौंदर्यीकरण किया जाए। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक प्रदीप बत्रा, सुरेश राठौर, डीसीबी चेयरमैन प्रदीप चौधरी, सुबोध राकेश, डॉ. जयपाल सिंह, पूर्व दायित्वधारी शोभाराम प्रजापति चौधरी धर्मपाल, प्रमोद कुमार, शिव कुमार आदि मौजूद रहे।
यह है कुंजा गांव का इतिहास
भगवानपुर : भले ही देश में आजादी के लिए 1857 की क्रांति को इतिहास में स्थान दिया गया हो, लेकिन कुंजा बहादुरपुर गांव में राजा विजय सिंह के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ 1822 में ही मोर्चा खोल दिया था। इसके बाद लगातार युद्ध होता रहा। अंग्रेजों ने पूरे गांव को घेरकर आग लगा दी थी। 3 अक्टूबर 1824 को पूरे गांव को ही शहीद कर दिया गया था। इसका जिक्र अंग्रेजी गजेटियर में है। गांव में दिवंगत शिक्षाविद् बाबू अजमेर सिंह ने तमाम दस्तावेजों से गांव के इतिहास को जुटाकर विभिन्न मंचों पर उपलब्ध कराया। उन्होंने मांग उठाई थी कि कुंजा बहादुरपुर की क्रांति को इतिहास में जगह दी जाए। करीब दो साल पहले उप राष्ट्रपति एम वैकेंया नायडू भी कुंजा गांव में आ चुके हैं।
विभिन्न संगठनों ने दिया ज्ञापन
विभिन्न संगठनों की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन दिया गया। भाजपा मंडल अध्यक्ष चंदन त्यागी ने सोलर लाइट, हैंडपंप लगवाने के साथ ही इस बार गन्ने का दाम 375 रुपये करने एवं किसान को अपने खेत से निजी कार्य के लिए मिट्टी उठान करने की अनुमति देने की मांग की।
रुड़की पहुंच सीएम ने दी सांत्वना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोपहर के समय रुड़की आइआइटी के सामुदायिक भवन पर पहुंचे और यहां पर आयोजित शोकसभा में पूर्व दायित्वधारी श्यामवीर सैनी एवं उनके स्वजन को सांत्वना दी। श्यामवीर सैनी की पत्नी का पिछले माह निधन हो गया था। इस दौरान यहां पर उन्होंने आचार्य बालकृष्ण से भी मुलाकात की। करीब 15 मिनट रुकने के बाद मुख्यमंत्री यहां से देहरादून के लिए रवाना हो गए।
कम समय के लिए बंद रखा गया रूट
रुड़की: मुख्यमंत्री के आगमन से रविवार को रुड़की वासियों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले दिनों डीजीपी को निर्देश दिए थे कि उनके काफिले के निकलने के दौरान काफी देर तक यातायात रोका जाता है जोकि ठीक नहीं है। लिहाजा कम समय के लिए यातायात को रोका जाए।
