रुड़की: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य स्वराज विद्वान ने कहा कि आइआइटी रुड़की प्रबंधन से वार्ता कर मुख्य भवन में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि देश में जगह-जगह अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों पर अत्याचार होने के पीछे उन्हें कोई षडयंत्र लग रहा है। यह बातें उन्होंने सोमवार को आइआइटी रुड़की परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।

सोमवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य स्वराज विद्वान आइआइटी रुड़की में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंची। इसके बाद उन्होंने आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति से संबंधित किसी भी प्रकार के उत्पीड़न होने की घटना की जानकारी मिलते ही हम तुरंत घटना स्थल पर जाते हैं और पीड़ित को न्याय दिलाने का काम करते हैं। स्वराज विद्वान ने कहा कि पहले जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति निवारण अधिनियम था, उसमें बहुत सारी खामियां थी, लेकिन अब संशोधित कर एक मजबूत अधिनियम बनाया गया है। पीड़ितों को इसका फायदा मिल रहा है।

Posted By: Jagran

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