संवाद सूत्र, लालढांग: लालढांग और कोटद्वार के बीच पड़ने वाली बरसाती नदी सिगड़ी सोत पर जमकर उफन रही है। स्थानीय लोग बाइक को कंधे में उठाकर इस नदी को जान जोखिम में डालकर पार कर रहे हैं। पूर्व में इस नदी में बरसात के दौरान कई बड़े हादसे हो चुके हैं।

इसे लालढांग और कोटद्वार के ग्रामीणों का दुर्भाग्य कहें या राजनीति का परिणाम। लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग की स्थिति आंदोलन के बाद भी जस की तस है। आलम यह है कि बरसात के दौरान लालढांग से कोटद्वार और कोटद्वार से लालढांग आने वाले को जान जोखिम में डाल सफर करने को मजबूर होना पड़ता है। दरअसल लालढांग और कोटद्वार के बीच पड़ने वाली बरसाती नदी सिगड़ी सोत और अन्य एक नदी में बरसात का पानी इस कदर आता है कि जनता को इसे पार करना मुश्किल हो जाता है। वहीं पहाड़ों में हो रही लगातार बारिश से इस समय सिगड़ी सोत नदी जमकर बह रही है। सोमवार को कोटद्वार से कुछ लोग हरिद्वार की ओर आ रहे थे। तभी नदी में पानी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया। युवकों ने बाइक को कंधे में रख किसी तरह नदी को पार किया, हालांकि इस दौरान कोई घटना नहीं घटी। बता दें कि राज्य गठन के बाद से ही क्षेत्रीय जनता इस मोटर मार्ग निर्माण की मांग करती आई है, हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सत्ता संभालते ही इसकी घोषणा की थी, मगर पहले राष्ट्रीय हरित बाघ प्राधिकरण और उसके बाद कोर्ट के आदेश के बाद मार्ग निर्माण का काम रोक दिया गया था। अब इस मार्ग निर्माण को कुछ शर्तों के आधार पर निर्माण की स्वीकृति मिली है, लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्हें तब तक विश्वास नहीं होगा, जब तक काम पूरा नहीं होगा। ऐसी घोषणाएं और स्वीकृति कई बार मिल चुकी है, लेकिन फिर निर्माण में कोई ना कोई अड़ंगा पड़ ही जाता है।

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