जागरण संवाददाता, हरिद्वार: एक तरफ जिले में डेंगू का कहर हर दिन बढ़ रहा है। डेंगू पीड़ित मरीजों को प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सेपरेटर यूनिट को सक्रिय तो किया गया, लेकिन ब्लड बैंक में स्टाफ की कमी के कारण इसके संचालन में परेशानी हो रही है। उधार के पैथोलाजिस्ट से दोनों यूनिट चलाई जा रही हैं।

जिला अस्पताल के अधीन ब्लड बैंक संचालित किया जाता है। ब्लड बैंक की वर्तमान में क्षमता 1200 यूनिट रक्त एकत्रित कर स्टोर करने की है। जिले में डेंगू के हर साल बढ़ते कहर को देखते हुए पिछले साल ब्लड बैंक में ही ब्लड सेपरेटर यूनिट को क्रियाशील किया गया। मगर ब्लड सेपरेटर यूनिट के लिए अलग से स्टाफ की तैनाती की कौन कहे ब्लड बैंक वाले स्टाफ से ही सेपरेटर यूनिट का भी संचालन कराए जाने लगा। ब्लड बैंक भी राजकीय मेला अस्पताल के वरिष्ठ पैथोलाजिस्ट के भरोसे चलाया जा रहा है। ऐसे में ब्लड बैंक और ब्लड सेपरेटर यूनिट में स्टाफ की कमी से डेंगू के बढ़ते कदम को रोकने के उपायों पर भी असर पड़ रहा है।

चौबीस घंटे संचालित हो रहा ब्लड बैंक

ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एसएन खान का कहना है ब्लड बैंक में पहले ही स्टाफ की कमी है। वहीं ब्लड सेपरेटर यूनिट को 24 घंटे चार शिफ्ट में चलाने के लिए एक चिकित्साधिकारी, एक पैथोलाजिस्ट और हर शिफ्ट के लिए कम से कम दो तकनीशियन चाहिए। मगर संविदा के लैब तकनीशियनों से काम चला रहे हैं। ब्लड बैंक में भी स्टाफ की कमी है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे चुके हैं। स्थाई टेक्नीशियनों की तैनाती शासन को करनी चाहिए, जिससे कार्य में और सहूलियत हो सके।

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