150 पेज... 1000 कॉफी टेबल बुक, ड्रोन और सैकड़ों कैमरे हरिद्वार अर्धकुंभ की भव्यता करेंगे अमर
अर्धकुंभ की भव्यता को तस्वीरों और फिल्मों के माध्यम से सहेजने की तैयारी है, जिसमें ड्रोन और पेशेवर कैमरों से तैयारियों से लेकर समापन तक की कवरेज होगी।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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जागरण संवाददाता, हरिद्वार। अर्धकुंभ की धार्मिक और सांस्कृतिक भव्यता को तस्वीरों और फिल्म के जरिये सहेजने की तैयारी है। मेले से जुड़ी सभी प्रमुख गतिविधियों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जाएगी, फिर इनसे डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जाएगी।
अर्धकुंभ की विशेषताओं को दर्शाती काफी टेबल बुक भी प्रकाशित की जाएंगी। शहरी विकास विभाग ने इसके लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अर्धकुंभ के दौरान देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु धर्मनगरी आने का अनुमान है। प्रमुख स्नान पर्व, संतों की पेशवाई, अखाड़ों की गतिविधियां, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक आयोजन मेले के प्रमुख आकर्षण होंगे। पहले चरण में अर्धकुंभ की तैयारियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को कैमरे में कैद किया जाएगा।
दूसरे चरण में मेले के दौरान होने वाले प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की कवरेज होगी। तीसरे चरण में समापन के बाद पूरे आयोजन का दृश्य दस्तावेज तैयार किया जाएगा। इस तरह इन्हें संरक्षित किया जाएगा। इसमें हरकी पैड़ी समेत प्रमुख गंगा घाटों, मेला क्षेत्रों और अलग-अलग सेक्टरों की गतिविधियां शामिल होंगी।
शाही स्नान, अखाड़ों की पेशवाई, धार्मिक जुलूस, संतों की गतिविधियां और अन्य प्रमुख आयोजन कैमरे में दर्ज किए जाएंगे। ड्रोन के माध्यम से मेला क्षेत्र, घाटों और श्रद्धालुओं की भीड़ के हवाई दृश्य लिए जाएंगे। जमीन से पेशेवर कैमरों के जरिये आयोजनों और व्यवस्थाओं की विस्तृत तस्वीरें व वीडियो तैयार किए जाएंगे।
जरूरत के अनुसार प्रमुख स्थानों और आयोजनों की लाइव दृश्य कवरेज भी की जाएगी। धार्मिक आयोजनों के साथ अर्धकुंभ की तैयारियों और व्यवस्थाओं को भी इस दस्तावेजीकरण में जगह मिलेगी। मेला क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्य, सड़क, घाट, पार्किंग, परिवहन व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, भीड़ नियंत्रण, सफाई और आपातकालीन सेवाओं की स्थिति रिकार्ड की जाएगी।
गंगा की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन से जुड़े पहलुओं को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे मेले में विकसित किए गए बुनियादी ढांचे और श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का भी रिकार्ड तैयार होगा।
धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक
डाक्यूमेंट्री फिल्म में मेले की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत, अखाड़ों की परंपराओं, प्रमुख आयोजनों, प्रशासनिक तैयारियों और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं को क्रमबद्ध तरीके से दिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य अर्धकुंभ की पूरी कहानी को दृश्य माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाना है। अर्धकुंभ की 1000 काफी टेबल बुक प्रकाशित की जाएंगी।
प्रत्येक पुस्तक कम से कम 150 पृष्ठ की होगी। इसमें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रमुख धार्मिक आयोजनों, अखाड़ों की परंपराओं, गंगा घाटों, मेले की व्यवस्थाओं और खास दृश्यों को आकर्षक तस्वीरों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। पुस्तक के लिए सामग्री जुटाने, लेखन, संपादन, तस्वीरों का चयन, डिजाइन और छपाई की जिम्मेदारी चयनित एजेंसी की होगी। इसका डिजिटल संस्करण भी तैयार किया जाएगा।
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