हरिद्वार अर्धकुंभ में गंगा घाटों पर हाईटेक सर्विलांस, 82.13 लाख की लागत से लगेंगे AI कैमरे, चेहरा स्कैन कर होगी पहचान
हरिद्वार में अर्धकुंभ से पहले गंगा घाटों पर 82.13 लाख रुपये की लागत से एआई-आधारित सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे।

घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा कई कारणों से चुनौतीपूर्ण रहती है। फाइल फोटो

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जागरण संवाददाता, हरिद्वार। अर्धकुंभ के दौरान गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी है।
इन कैमरों की खासियत केवल वीडियो रिकार्डिंग तक सीमित नहीं होगी। इनमें चेहरे की पहचान, लोगों और वाहनों को पहचानने, प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी के प्रवेश और एक निर्धारित सीमा को पार करने जैसी गतिविधियों का पता लगाने की तकनीक भी होगी।
कैमरों के जरिये घाटों पर भीड़ का घनत्व, कतार की लंबाई और भीड़ वाले क्षेत्रों का आकलन करने की सुविधा भी प्रस्तावित है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) ने इस काम के लिए 82.13 लाख रुपये की अनुमानित लागत निर्धारित की है। धर्मनगरी में गंगा स्नान के लिए रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
घाटों पर बढ़ जाती है भीड़
पर्वों और विशेष स्नान के दौरान घाटों पर भीड़ बढ़ जाती है। अर्धकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या और आवाजाही को देखते हुए निगरानी व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाएगा। ऐसे में कैमरों की मदद से घाटों पर नजर रखने और किसी घटना की स्थिति में संबंधित कर्मचारियों तक सूचना पहुंचाने में मदद मिलेगी। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा कई कारणों से चुनौतीपूर्ण रहती है।
गंगा के किनारे फिसलन, पानी के तेज बहाव, गहरे पानी में चले जाने और भीड़ के दबाव जैसी परिस्थितियों में हादसे हो सकते हैं। भीड़ अधिक होने पर किसी व्यक्ति के लापता होने या परिवार से बिछड़ने की स्थिति में भी उसे तलाशना मुश्किल हो जाता है। सीसीटीवी कैमरों से घाटों के अलग-अलग हिस्सों पर नजर रखी जाएगी।
इससे निगरानी कर्मचारियों को किसी स्थान की स्थिति समझने और जरूरत पड़ने पर संबंधित टीम को वहां भेजने में सहायता मिलेगी। भीड़ बढ़ने की स्थिति में संवेदनशील स्थानों की पहचान और लोगों की आवाजाही पर नजर रखने में भी यह व्यवस्था उपयोगी होगी।
दो तरह के कैमरे लगाए जाएंगे
योजना में आउटडोर बुलेट कैमरे और पीटीजेड कैमरे लगाने का प्रविधान है। बुलेट कैमरों में रात के समय निगरानी के लिए इन्फ्रारेड व्यवस्था होगी। इनके लिए 50 से 80 मीटर तक की इन्फ्रारेड दूरी, मोटर से नियंत्रित होने वाले लेंस और मेमोरी कार्ड लगाने की सुविधा निर्धारित की गई है। ये कैमरे धूल और पानी से सुरक्षा के निर्धारित मानकों के अनुरूप होंगे। दूसरी श्रेणी में पीटीजेड कैमरे हैं।
इन्हें जरूरत के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में घुमाया जा सकता है। इनमें 33 गुना आप्टिकल जूम और 200 मीटर तक की इन्फ्रारेड निगरानी क्षमता का प्रविधान है। इससे दूर स्थित क्षेत्र को करीब से देखने और रात में भी निगरानी करने में मदद मिलेगी।
इन कैमरों में भी चेहरे की पहचान, भीड़ का आकलन और निर्धारित क्षेत्र में गतिविधियों का पता लगाने जैसी एआई सुविधाएं होंगी। एआई तकनीक का इस्तेमाल कैमरों से प्राप्त दृश्यों के विश्लेषण में किया जा सकता है।
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