जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Mahant Narendra Giri Death Case श्रीपंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमंहत नरेन्द्र गिरि के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने मामले की जांच की मांग कतरे हुए कहा कि श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम से पहले केंद्र और राज्य सरकार को मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूरा संत समाज श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि की मौत की सच्चाई जानना चाहता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में किसी भी स्तर पर कोई कोताही नहीं बरती गई तो संत समाज चुप नहीं बैठेगा। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने इसे साजिश बताते हुए कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरि सनातन हिंदू धर्म, उससे जुड़े प्रतीकों, संत आदि पर होने वाले हमले के घोर विरोधी थे।

वे राष्ट्र, धर्म, समाज हित के सभी मामलों में अपनी बेबाक राय रखते थे। धार्मिक संपत्तियों, फर्जी संत, फर्जी अखाड़े, फर्जी शंकराचार्ज को लेकर उन्होंने तमाम विरोधों के बाद भी न सिर्फ कड़ी कार्रवाई की थी, बल्कि उन्हें बाहर होने के लिए मजूबर भी किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हीं सब बातों को लेकर तमाम धर्म और समाज विरोधी तत्व उनके दुश्मन बन गए थे और लगातार उन्हें नुकसान पहुंचाने की धमकी देते रहते थे। उन्होंने कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के दोनों घुटनों में तकलीफ थी, ऐसे में उनका पंखे से लटककर जान देने की बात गले नहीं उतरती।

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महंत नरेंद्र गिरी बेहद मजबूत संत थे 

श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के महामंडेलश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि महाराज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की मौत से बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि जो जानकारी मिली है वह संदेह पैदा करती है। महंत नरेंद्र गिरी बहुत ही मजबूत संत थे। वह ऐसा कदम नहीं उठा सकते हैं। उनकी मृत्यु से काफी सदमा लगा है। पिछले ही दिनों उनसे वार्ता भी हुई थी। उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु को लेकर उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए। उन्हें इस पूरे मामले में किसी षडयंत्र की आशंका है। जरूरत पड़ी तो वह भारत सरकार से भी मांग करेंगे कि इस मामले की जांच शीर्ष जांच एजेंसी से कराई जाए। 

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Edited By: Raksha Panthri