जागरण प्रतिनिधि, हरिद्वार: रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास ने कहा कि भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा योग आयुर्वेद को पतंजलि योगपीठ ने पूरे विश्व में फैलाया और वैज्ञानिक स्तर पर सम्मान दिलाया। श्री गोपालदास रविवार को पतंजलि योगपीठ मे आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस के कार्यक्रम में बोल रहे थे।

रविवार को पतंजलि योगपीठ में आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिवस जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर नृत्य गोपालदास ने कहा कि योग और आयुर्वेद भारत में उपेक्षित था। इसी पीड़ा से व्यथित हेाकर योगगुरु बाबा रामदेव ने योग को व आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद को पतंजलि योगपीठ के माध्यम से जन जन तक पहुंचाकर मानवता के हित में कार्य किया। इस अवसर पर बाबा रामदेव ने कहा कि आज भारत व नेपाल स्थित योग साधकों और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं द्वारा जड़ी-बूटी दिवस के रूप में आचार्य बालकृष्ण का जन्म दिन मनाया जा रहा है। श्रावण मास में जड़ी-बूटियों का जन्म होता है और श्रावण में ही आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिन भी है। उन्होंने कहा कि सृष्टि के आदिकाल से ही आयुर्वेद अस्तित्व में है। आयुर्वेद के सेवन से शरीर पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता, जबकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की दवाएं शरीर पर साइड इफेक्ट डालती हैं।

बाबा ने कहा कि पतंजलि योगपीठ के साथ उनसे जुड़े सारे प्रकल्पों में निर्माण व कार्य निर्देशन का कार्य आचार्य बालकृष्ण के पर ही निर्भर है। उसी तरह नेपाल में भी हमारे संगठन युवा भारत और युवा नेपाल कार्यरत हैं। इस अवसर पर पतंजलि बायो रिसर्च इंस्टीट्यूट तथा भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर के बीच अनुबंध पर अंतिम मुहर भी लगी। दोनों संस्थाएं बायोगैस, पशु आहार, खाद, बीज व विषमुक्त खेती पर साझा कार्य करेंगी। इस अवसर पर भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर की प्रिंसिपल साइंटिस्ट स्मिता एस. मुले ने कहा कि दोनों संस्थाओं के बीच यह अनुबंध किसानों के लिए वरदान साबित होगा।

इसके बाद शाम के समय कार्यक्रम में रविंद्र जैन की भजन संध्या में श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। मंच पर आई विख्यात सिने अभिनेत्री मनीषा कोइराला भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।

पांच पुस्तकों का विमोचन

आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस पर उनके द्वारा लिखी गई पांच पुस्तकों 'आयुर्वेद जड़ी-बूटी रहस्य'(भाग-तीन), 'भोजन कौतुहलम्', 'आयुर्वेद महोदधि', 'अजीर्णामृत मंजरी' और 'विचार क्रांति'(नेपाली ग्रंथ) का विमोचन किया गया। इस अवसर पर पुस्तक के लेखकीय कार्य में सहयोग करने वाली टीम के सदस्यों को बाबा रामदेव ने सम्मानित किया।

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