देहरादून, [जेएनएन]: पति के शव के अंतिम संस्कार को लेकर पत्नियां आमने-सामने आ गईं। एक लक्खीबाग श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की बात पर अड़ी थी तो दूसरी केहरी गांव स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कराना चाहती थी। इसे लेकर दोनों पक्षों के लोग हंगामा करने लगे। सूचना पर प्रेमनगर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। बाद में पुलिस ने दोनों को समझा-बुझाकर केहरी गांव के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कराया। 

जानकारी के मुताबिक, प्रेमनगर विंग नंबर एक निवासी विजय पुत्र संतन आईएमए में चतुर्थ क्षेणी कर्मचारी थे। विजय की लक्ष्मी और किरण नाम की दो पत्नियां हैं। पहली पत्नी लक्ष्मी आईएमए में रहती हैं, जबकि दूसरी पत्नी किरण विंग नंबर एक में। विजय दूसरी पत्नी किरण के साथ ही विंग नंबर एक में रहते थे। विजय काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। दून अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 

गुरुवार को उनका निधन हो गया। परिजन शव को प्रेमनगर स्थित घर ले आए। बताया जा रहा है कि किरण अपनी बेटियों के साथ विलाप कर रही थीं, इसी दौरान लक्ष्मी भी अपने बच्चों के साथ प्रेमनगर पहुंच गईं। इसके बाद दोनों के बीच अंतिम संस्कार को लेकर बहस होने लगी। पहली पत्नी का कहना था कि वह लक्खीबाग श्मशान घाट में पति का अंतिम संस्कार करेंगी और अंतिम संस्कार की रसीद भी वह खुद लेंगी। जबकि दूसरी पत्नी शव का अंतिम संस्कार केहरी गांव श्मशान में कराने की बात पर अड़ी थी। 

इसे लेकर उनके बीच जमकर कहासुनी हुई। हंगामा होता देख बड़ी संख्या में स्थानीय लोग वहां जमा हो गए। इतने में पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, मगर वह मानने को तैयार नहीं थे। बाद में आसपास के लोगों और पुलिस के मनाने पर दोनों शांत हुईं और शव का अंतिम संस्कार केहरी गांव श्मशान घाट में किया गया।

जमीन और नौकरी के लिए हुआ ड्रामा

बताया जा रहा है कि विजय अभी नौकरी में ही थे। इसलिए बच्चों को नौकरी और जमीन के लिए दोनों पत्नियां अपने अनुसार अंतिम संस्कार कर रसीद लेना चाहती थीं।

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Posted By: Sunil Negi

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