देहरादून, रीतिका पठानिया। हैदराबाद प्रकरण के बाद फिर से देशभर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। ऐसे में दून की आधी आबादी भी सिस्टम से इस सवाल का जवाब मांग रही है कि आखिर वह कब खुद को निर्भय महसूस कर पाएंगी?

इसकी वजह यह कि दून में महिला सुरक्षा के नाम पर सिर्फ बातें और दावे ही गंभीरता से होते रहे हैं। उनको धरातल पर उतारने में उतनी रुचि नहीं दिखाई गई, जितना ढिंढोरा पीटने में। फिर चाहे बात महिलाओं के लिए स्पेशल ऑटो और निर्भया बसों के संचालन की हो या सिटी बसों में महिलाओं के लिए बनाए गए स्पेशल केबिन व सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग की। अन्य राज्यों की देखा-देखी ये सुविधाएं दून में शुरू तो की गईं, लेकिन कामयाब नहीं हो पाईं।

ये हश्र हुआ योजनाओं का

  • स्पेशल ऑटो: महिलाओं के लिए स्पेशल ऑटो जनवरी 2013 में चलाए गए थे, जो अप्रैल 2013 में ही बंद हो गए।
  • निर्भया बस: जनवरी 2013 में ही निर्भया बस सेवा भी शुरू हुई थी, जो बामुश्किल छह माह ही चल पाई।
  • लेडीज केबिन: सिटी बसों में महिलाओं के लिए स्पेशल केबिन की व्यवस्था भी कुछ दिनों में ही दम तोड़ गई। फिलहाल इन केबिन में महिलाएं कम पुरुष ज्यादा नजर आते हैैं। 
  • सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग: अधिकारियों ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देने का दावा किया था। फिलहाल जिले में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं चल रहा है।

 इनकी सुनिये

यातायात निदेशक केवल खुराना ने बताया कि निर्भया कांड के बाद जनवरी 2013 में दून में महिलाओं के लिए स्पेशल ऑटो चलाए गए थे। इसका महिलाओं ने लाभ नहीं उठाया। दो साल पहले महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी दी गई थी। हालांकि, कितनी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया, इसके  आंकड़े नहीं हैं। पुलिस ने बसों व कॉमर्शियल वाहनों में पैनिक बटन लगवाने के साथ अधिकारियों के नंबर दर्ज कराए हैं। महिलाएं उनका इस्तेमाल करें।

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अब जागा महिला आयोग

जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश मिश्रा ने बताया कि नौ से 11 दिसंबर तक बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत ब्लॉकवार 100-100 लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जाएगी।

रेखा आर्या  (राज्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) का कहना है कि इन सुविधाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। सरकार ने महिलाओं के लिए बहुत-सी योजनाएं चलाई हैं। जिनका महिलाएं लाभ उठा रही हैं।

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हैदराबाद प्रकरण के बाद फिर से देशभर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। ऐसे में दून की आधी आबादी आखिर कब खुद को निर्भय महसूस कर पाएंगी।

Posted By: Sunil Negi

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