यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 23, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दून शहर में चौराहों को आसानी से पार कर सकेंगे दृष्टिबाधित, जल्द प्रयोग में लाए जाएंगे आडियो स्पर्श डिवाइस
दृष्टिबाधितों को चौराहे पार करने में जोखिम उठाना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए स्मार्ट सिटी की ओर से ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून। दून शहर में वाहनों का दबाव अधिक होने के कारण दृष्टिबाधितों को चौराहे पार करने में जोखिम उठाना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए स्मार्ट सिटी की ओर से चौराहों पर लगाए गए आडियो स्पर्श डिवाइस जल्द प्रयोग में लाए जाएंगे। डिवाइस को छूते ही अनाउंसमेंट किया जाएगा, जिसके बाद दृष्टिबाधित आसानी से सड़क पार कर सकेंगे।
सोमवार को यातायात निदेशक मुख्तार मोहसिन ने दृष्टिबाधितों की सुविधा के लिए ट्रैफिक जंक्शन में लगाए गए डिवाइस के इस्तेमाल के संबंध में गोष्ठी की। उन्होंने कहा कि नगर के विभिन्न चौराहों व तिराहों पर यातायात का शोर अधिक होने के कारण डिवाइस की आवाज पूरी नहीं सुनाई देती। इसलिए डिवाइस की आवाज बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि पहले चरण में राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांग सशक्तीकरण संस्थान (एनआइवीएच) के छात्र-छात्राओं को और अन्य दृष्टिबाधितों को यातायात पुलिस और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों की ओर से डिवाइस का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद सभी को देहरादून के विभिन्न ट्रैफिक जंक्शन पर डिवाइस का प्रेक्टिकल रूप से प्रयोग करवाया जाएगा।
अनुसूचित जाति आयोग ने डीजीपी से मांगी रिपोर्ट
उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग ने दून की बद्रीश कालोनी डांडा धर्मपुर निवासी एक व्यक्ति के साथ मारपीट और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग को लेकर पुलिस महानिदेशक से रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने 29 नवंबर तक रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। मामला 30 सितंबर 2021 का है। शिकायतकर्ता विनोद कुमार का आरोप है कि अतुल शर्मा व आठ से दस अन्य व्यक्तियों ने उनके प्लाट के मुख्य गेट पर जोर-जोर से लात मारते हुए उन्हें जातिसूचक गालियां दीं। विनोद के मुताबिक उन्हें लाठी-डंडों से पीटा गया और भूमि कब्जाने की कोशिश भी की गई।
वहीं, इस मामले में थाना नेहरू कालोनी के एसएसआइ शिव मोहन शाह ने जांच की। पुलिस के अनुसार, जब प्लाट की सुरक्षा में तैनात गार्ड से पूछताछ की गई तो उसने जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, मारपीट व गाली-गलौज की बात से इन्कार किया। भूमि विवादित है, जिसका मामला अदालत में विचाराधीन है। एसएसआइ ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा कि शिकायतकर्ता विनोद कुमार की ओर से भूमि संबंधित कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। केवल कब्जे के आधार पर भूमि को अपना बताया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि अगर कोई कब्जे को लेकर भूमि पर उपस्थित होता है तो विनोद कुमार गाली-गलौज व जातिसूचक शब्दों का आरोप लगाता है
