उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में पेपर लीक रोकने को नया फॉर्मूला, विशेषज्ञ तैयार करेंगे प्रश्न बैंक
उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) पेपर लीक रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू कर रहा है। इसमें बाहरी विशेषज्ञों की मदद ...और पढ़ें

उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में पेपर लीक रोकने को नया फॉर्मूला।
HighLights
बाहरी विशेषज्ञ तैयार करेंगे गोपनीय प्रश्न बैंक।
परीक्षा से आधा घंटा पहले मिलेंगे प्रश्न पत्र।
जुलाई में पेपर लीक के बाद लिया गया निर्णय।
जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) पेपर लीक रोकने के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था बदलने की तैयारी में है। अब विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों के शिक्षकों के बजाय दिल्ली विश्वविद्यालय और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
विशेषज्ञ प्रश्न बैंक तैयार करेंगे और तकनीक की मदद से उसमें से गोपनीय प्रश्न पत्र बनाया जाएगा। परीक्षा शुरू होने से आधा घंटे पहले केंद्रों को प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
जुलाई में पेपर लीक होने पर रद करनी पड़ी थी परीक्षा
जुलाई में यूटीयू से संबद्ध एक निजी संस्थान में पेपर लीक का मामला सामने आया था। इसके बाद विश्वविद्यालय को मशीन लर्निंग फार इंटरनेट आफ थिंग्स विषय की परीक्षा रद करनी पड़ी थी।
इस घटना के बाद विश्वविद्यालय ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था तैयार करने की पहल की है। इसके तहत प्रश्न पत्र बनाने की प्रक्रिया में बाहरी विशेषज्ञों की मदद लेने के साथ उसकी गोपनीयता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
पहली बैठक हो चुकी, दूसरी के बाद फैसला
यूटीयू की कुलपति डा. तृप्ता ठाकुर ने बताया कि नई व्यवस्था को लेकर पहली बैठक हो चुकी है। दूसरी बैठक के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। योजना के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय और गढ़वाल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ यूटीयू के विशेषज्ञ भी प्रश्न बैंक तैयार करेंगे।
इसके बाद तकनीक की सहायता से प्रश्न बैंक से प्रश्न पत्र तैयार किया जाएगा। विवि इस व्यवस्था पर भी काम कर रहा है कि प्रश्न पत्र परीक्षा केंद्रों को पहले से उपलब्ध कराने के बजाय परीक्षा शुरू होने से आधा घंटे पहले भेजे जाएं। इससे प्रश्न पत्र लीक होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।
कुलपति के अनुसार, तकनीक के सकारात्मक इस्तेमाल से ऐसी प्रणाली विकसित की जा सकती है, जो परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के साथ धोखाधड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से बचाने में मददगार हो। हालांकि, नई व्यवस्था लागू करने पर अंतिम निर्णय दूसरी बैठक के बाद लिया जाएगा।
