नमो दैव्यै-महा दैव्यैः उत्तराखंड की युवा उद्यमियों ने नवाचार से वंचित परिवारों को दी आत्मनिर्भरता और रोजगार की राह
उत्तराखंड की युवा महिला उद्यमी मानसी कापड़ी और साधना रतूड़ी अपने स्टार्टअप्स 'सार्निक नेचुरल्स' और 'खुद एंटरप्राइजेज' के माध्यम से ...और पढ़ें


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अशोक केडियाल, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड की युवा महिला उद्यमी अपने नवाचार और मेहनत से आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रही हैं। साथ ही वंचित परिवारों को स्वरोजगार की भी राह दिखा रही हैं। युवतियां स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक उत्पादों को बाजार से जोड़ने के साथ ही वे रोजगार के अवसर भी विकसित कर रहे हैं।
पिथौरागढ़ की मानसी कापड़ी और देहरादून की साधना रतूड़ी इसी दिशा में काम कर रही हैं। इनके स्टार्टअप न केवल पौष्टिक खाद्य उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
मानसी ने सार्निक नेचुरल्स’ से युवाओं को जोड़ा
एलएसएम कैंपस, पिथौरागढ़ में बीबीए की विद्यार्थी मानसी कापड़ी ने पिछले वर्ष ‘सार्निक नेचुरल्स’ की शुरुआत की। उनका उद्देश्य उचित कीमत पर पौष्टिक खाद्य विकल्प उपलब्ध कराना है।
स्टार्टअप के उत्पादों में ए2 घी, प्राकृतिक शहद, कोल्ड-प्रेस्ड तेल, मिलेट पास्ता, सब्जियों और मिलेट से बने चिप्स, रोस्टेड मखाना तथा फ्लेवर्ड सीड्स शामिल हैं।
आनलाइन बिक्री के साथ स्टाल और अन्य आफलाइन माध्यमों से भी उत्पादों की बिक्री की जा रही है। स्टार्टअप ने पिछली तिमाही में 2.5 लाख रुपये का कारोबार किया। इससे कई गरीब परिवार भी जुड़े हैं। स्टाल संचालन, बिक्री और मार्केटिंग के माध्यम से स्थानीय 20 से अधिक युवाओं को पार्ट टाइम रोजगार भी मिल रहा है।
साधना की ‘खुद एंटरप्राइजेज’ बनने की साधना हुई साकार
देहरादून की साधना रतूड़ी ने उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘खुद एंटरप्राइजेज’ की शुरुआत की। देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत उद्यमिता विकास कार्यक्रम से जुड़कर उन्होंने अपने व्यावसायिक विचार को आगे बढ़ाया।
उच्च शिक्षा विभाग और एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (ईडीआइआइ), अहमदाबाद के सहयोग से संचालित प्रशिक्षण ने उन्हें उद्यमिता की बारीकियां समझने और व्यवसाय को दिशा देने में मदद की। उनके उद्यम का सालाना टर्नओवर लगभग दो लाख रुपये है।
साधना रतूड़ी का सपना केवल अपना व्यवसाय स्थापित करने तक सीमित नहीं है। वह उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक उत्पादों को देशभर में पहचान दिलाना चाहती हैं। हर्बल चाय, चिया सीड्स और पहाड़ी राजमा जैसे उत्पादों के माध्यम से स्थानीय छह वंचित परिवारों के 25 युवा सदस्य जुड़ चुके है।
