जागरण संवाददाता, देहरादून। Uttarakhand Weather Update उत्तराखंड में शुष्क मौसम और चढ़ते पारे के बाद मौसम के करवट बदलने के आसार बन रहे हैं। मौसम विभाग ने पांच जिलों में ओलावृष्टि को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। जबकि, कहीं-कहीं हल्की बारिश की भी संभावना जताई है। इसके अलावा मैदानी इलाकों में 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है।

उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी का एहसास हो रहा है। चटख धूप के बीच दिन में पारा बढ़ रहा है। देहरादून में अधिकतम तापमान 37, ऊधमसिंह नगर में 38 और हरिद्वार में 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। इसके अलावा पर्वतीय इलाकों में भी तापमान में इजाफा हो रहा है। ज्यादातर शहरों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से दो से पांच डिग्री सेल्सियस तक अधिक है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, शुक्रवार और शनिवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून और टिहरी में ओलावृष्टि और बारिश की आशंका है। इसके अलावा कई इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

विभिन्न शहरों का तापमान

शहर       अधिकतम  न्यूनतम

देहरादून     37.4     19.5

उत्तरकाशी   31.2     23.0

मसूरी       25.3     13.1

टिहरी       27.0     15.4

हरिद्वार      40.1     17.3    

जोशीमठ    25.3     12.2

पिथौरागढ़   29.1     13.0

अल्मोड़ा    30.7     14.1

मुक्तेश्वर    25.4     12.7  

नैनीताल     27.4     20.0

यूएसनगर    38.0    15.1

चम्पावत     26.1    11.0

बारिश न होने से फलपट्टी के काश्तकार परेशान 

बारिश नहीं होने से फलपट्टी के काश्तकार खासे परेशान है। काश्तकारों का कहना है कि बिना बारिश के मटर सहित अन्य नकदी फसल खराब होने लगी है यदि बारिश नहीं होती है तो इस बार फलपट्टी के काश्तकारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। चार किमी लंबी चंबा-मसूरी फलपट्टी में कुछ दिनों में ही मटर की फसल तैयार होने वाली है, लेकिन लंबे समय से बारिश नहीं होने से मटर की फसल खराब होने की कगार पर पहुंच गई है। इसके अलावा गेहूं सहित कई अन्य फसल भी खराब होने लगी है। 

फलपट्टी के काश्तकार काफी मात्रा में मटर का उत्पादन करते हैं और उनकी आर्थिकी मटर पर ही निर्भर है ऐसे में पिछले करीब सात माह से बारिश नहीं होने के कारण काश्तकार परेशान है। फलपट्टी के काश्तकार रामकृष्ण डबराल, खुशीराम डबराल, केशवानंद आदि का कहना है कि यदि समय पर बारिश नहीं होती है तो इस बार फलपट्टी के काश्तकारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका कहना है कि बारिश के अलावा फलपट्टी में पानी का एक भी स्रोत नहीं है।

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