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यूसीसी नियमावली में हुए बड़े बदलाव, विवाह पंजीकरण और लिव-इन संबंधों पर बने नए नियम

Published: Fri, 23 Oct 2026 08:27 AM (IST)

उत्तराखंड यूसीसी नियमावली में संशोधन हुए हैं, जिससे अब पंजीकृत विवाह में गलत नाम सुधारा जा सकेगा। साथ ही, लिव-इन ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत पंजीकृत विवाह में दर्ज गलत अथवा अपूर्ण नाम को आवश्यक दस्तावेज देकर बदला जा सकेगी। अभी तक इसकी व्यवस्था न होने के कारण आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कैबिनेट ने इसके लिए गृह विभाग के समान नागरिक संहिता नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमति प्रदान कर दी है।

प्रदेश में जनवरी, 2025 से यूसीसी लागू की गई थी। इसमें विवाह पंजीकरण अनिवार्य है। यद्यपि, इसमें एक बार पंजीकरण के दौरान दर्ज किए गए नाम को बदलने की कोई व्यवस्था नहीं थी। इस कारण कई बार अपूर्ण अथवा नाम में स्पेलिंग गलत दर्ज होने के कारण आमजन को कई अन्य आवश्यक दस्तावेज बनाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

अब इसमें संशोधन कर दिया गया है। इसके तहत अब रजिस्ट्रार को विवाह पंजीकरण रद्द करने और पुन: पंजीकरण का अधिकार दिया गया है। इससे यदि किसी का नाम गलत दर्ज है तो वह विवाह रद कराने के लिए आवदेन देकर विवाह पंजीकरण रद्द करा सकता है और फिर आवश्यक दस्तावेज देकर नए सिरे से विवाह पंजीकरण करा सकता है।

एक अन्य अहम बदलाव के तहत यूसीसी में अब लिव इन के दौरान पहले संबंध से यदि कोई महिला गर्भधारण कर लेती है और पहला संबंध समाप्त करने और दूसरा संबंध बनाने पर उसे इसकी जानकारी देना जरूरी नहीं होगा। पहले व्यवस्था यह थी कि महिला को दूसरे संबंध में जाने पर संबंधित व्यक्ति के साथ ही पुलिस काे भी इसकी जानकारी देनी होती थी।

इसके अलावा नियमावली में अब रजिस्ट्रार का दायित्व सचिव के स्थान पर अपर सचिव स्तर के अधिकारी को दिए जाने की व्यवस्था की गई है। वहीं, नियमावली में उल्लेखित आइपीसी की धाराओं को बीएनएस की धाराओं में परिवर्तित किया गया है। साथ ही इसमें दंड के स्थान पर शास्ति यानी पेनाल्टी या जुर्माना में परिवर्तित किया गया है।

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