उत्तराखंड में जलस्रोतों की गणना जारी स्प्रिंग एटलस से होगा संरक्षण, जनवरी से अब तक 46,358 जलस्रोतों की हुई गणना
उत्तराखंड में प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण हेतु स्प्रिंग एटलस बनाने के लिए राज्यभर में जलस्रोतों की गणना की जा रही ...और पढ़ें


समय कम है?
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केदार दत्त, जागरण देहरादून। मध्य हिमालयी राज्य उत्तराखंड में प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाने और उनके संरक्षण की रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से स्प्रिंग एटलस बनाया जाएगा। इसके लिए प्रदेशभर में जलस्रोतों की गणना कराई जा रही है। जनवरी से अब तक 11 जिलों में 46,358 जलस्रोतों की गणना हो चुकी है और यह अभियान दिसंबर तक चलेगा।
गणना पूरी होने के बाद प्रदेश के जलस्रोतों की स्थिति का व्यापक आकलन कर उनके संरक्षण के लिए जरूरत के अनुसार प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्राकृतिक जलस्रोत पेयजल और स्थानीय जल जरूरतों का महत्वपूर्ण आधार हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में इनके सूखने अथवा जलप्रवाह कम होने की समस्या सामने आती रही है।
नीति आयोग की पूर्ववर्ती एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि राज्य में 300 से ज्यादा जलस्रोत या तो सूख चुके हैं या सूखने की कगार पर हैं। इस परिदृश्य में स्प्रिंग एटलस के जरिये पता चलेगा कि कितने जलस्रोत सक्रिय हैं, कितने सूख चुके हैं और कितनों में जलप्रवाह कम हुआ है।
मौजूदा स्थिति का आकलन होने से इनके संरक्षण की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिलेगी। जिन स्रोतों के सूखने का खतरा अधिक है, उनके पुनर्जीवन को विशेष प्रयास किए जा सकेंगे।
इसी के दृष्टिगत केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के निर्देशों के क्रम में राज्य में लघु सिंचाई विभाग के माध्यम से जलस्रोतों की गणना कराई जा रही है। इसके पूरी होने के बाद स्प्रिंग एटलस तैयार होगा।
लघु सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष बीके तिवारी के अनुसार जलस्रोतों की गणना जिलेवार कराई जा रही है। इसमें स्रोत किस स्थान पर है, उसका अक्षांक्ष-देशांतर क्या है, उसमें पानी की क्या स्थिति है। ऐसे तमाम बिंदुओं के साथ स्रोत की फोटो भी जलशक्ति मंत्रालय के पोर्टल पर अपलोड की जा रही हैं।
इसके अलावा जो स्रोत सूख चुके हैं, उनके बारे में भी जानकारी जुटाकर इसका आंकड़ा अपलोड किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्षाकाल में गणना कार्य नहीं हो पाया था। अब हरिद्वार व ऊधम सिंह नगर समेत सभी जिलों में यह कार्य प्रारंभ किया जा रहा है।
अब तक जलस्रोतों की गणना
जिला - संख्या
अल्मोड़ा - 10,130
चमोली - 8,714
चंपावत - 4,593
टिहरी - 4,281
उत्तरकाशी - 4,185
पिथौरागढ़ - 3,672
पौड़ी - 3,222
बागेश्वर - 3,058
रुद्रप्रयाग - 2,519
देहरादून - 1,338
नैनीताल - 646
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