संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग: बदरीनाथ हाइवे पर स्थित सिरोबगड़ भूस्खलन जोन बीते लगभग 50 वर्षों से रुद्रप्रयाग व चमोली जिले की सात लाख से अधिक की आबादी के लिए मुसीबत बना हुआ है।

पहाड़ी से लगातार गिर रहे बोल्डर 

इस बार भी बरसात शुरू होते ही यह भूस्खलन जोन सक्रिय हो उठा है और पहाड़ी से लगातार बोल्डर गिर रहे हैं। ऐसे में यहां लगातार अनहोनी की आशंका बनी हुई है।

1970 के बाद से सक्रिय हुआ भूस्खलन जोन

बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर-रुद्रप्रयाग के बीच स्थित सिरोबगड़ भूस्खलन जोन वर्ष 1970 के बाद से सक्रिय है। बीच में कुछ वर्ष यहां स्थिति लगभग सामान्य रही, लेकिन इस बरसात यह फिर सक्रिय हो उठा है।

जोखिम उठाकर गुजरते हैं वाहन

पहाड़ी से लगातार बोल्डर गिरने से यहां से वाहनों को जोखिम उठाकर गुजरना पड़ रहा है। सीमा सड़क संगठन की ओर से भूस्खलन रोकने के लिए किए गए उपायों के चलते वर्ष 1990 के बाद लगभग दस वर्षों तक यहां काफी हद तक राहत रही।

बनी रहती है दुर्घटना की आशंका

लेकिन वर्ष 2000 के बाद फिर भूस्खलन जोन सक्रिय हो गया और अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। वर्षा होने पर यहां हाइवे अक्सर अवरुद्ध हो जाता है और हर वक्त दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

वर्ष 2023 तक तैयार होना है बाईपास

बताया जाता है कि चूना पत्थर से बनी यह पहाड़ी काफी कमजोर है और जरा-सी वर्षा में भी दरकने लगती है। इस समस्या को देखते हुए वर्ष 2019 में 700 करोड़ की लागत से सिरोबगड़ बाईपास का निर्माण शुरू किया गया था, जिसे वर्ष 2023 तक बनकर तैयार होना है। लेकिन, तब तक वाहनों को जोखिमभरा सफर ही करना पड़ेगा।

समस्या से जल्‍द मिलेगी मुक्ति

जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग मयूर दीक्षित का कहना है कि भूस्खलन जोन की समस्या से मुक्ति पाने के लिए सिरोबगड़ बाईपास का निर्माण चल रहा है। निर्माण एजेंसी को जल्द से जल्द निर्माण पूरा करने को कहा गया है। कार्यदायी संस्था को भी मौके पर मशीनें तैनात रखने को कहा गया है। ताकि मलबा आने पर उसे तत्काल हटाकर यातायात बहाल किया जा सके।

Edited By: Sunil Negi