उत्तराखंड में मानसून की विदाई से पहले तबाही का अलर्ट, सरकार और प्रशासन मुस्तैद... कहीं फंसने पर इन नंबर्स पर करें कॉल
उत्तराखंड में मानसून की विदाई से पहले भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनजर सरकार अलर्ट पर है। पिछले वर्षों में मानसून ने विदाई से पहले भारी तबाही मचाई थी।

विदाई से पहले तबाही का सबब बनता रहा है मानसून. File Photo

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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून । उत्तराखंड में विदाई से पहले मानसून तबाही का सबब बनता रहा है। पिछले साल ही 15-16 सितंबर को देहरादून जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाओं में 31 व्यक्तियों को जान गंवानी पड़ी थी, जबकि भवनों समेत परिसंपत्तियों को भारी क्षति पहुंची थी।
इसके बाद 17 सितंबर को चमोली जिले में आई आपदा में नौ व्यक्तियों की जान गई, जबकि 12 घायल हुए थे। इससे पहले वर्ष 2021 में भी 17 से 19 अक्टूबर के बीच राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आपदा ने तबाही मचाई थी। यही कारण है कि इस बार भी विदाई की ओर बढ़ते मानसून से तबाही के अंदेशे को देखते हुए सरकार चौकन्ना हो गई है।
दो दिन भारी वर्षा की चेतावनी
अब जबकि मानसून विदाई की ओर अग्रसर है तो ऐसे में मौसम विभाग ने दो दिन भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। ऐसे में पिछले अनुभवों को देखते हुए सरकार भी सतर्क हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद शासन-प्रशासन भी अलर्ट मोड पर हैं।
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इसी क्रम में आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने शुक्रवार को सभी जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर अलर्ट मोड पर रहने, किसी भी आपात स्थिति से निपटने को सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने, रेड एवं आरेंज अलर्ट वाले जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करने, जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को सक्रिय रखने तथा मौसम संबंधी प्रत्येक चेतावनी को तत्काल निचले स्तर तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
उन्होंने नदी-नालों, गदेरों एवं जलस्रोतों के जलस्तर पर निगरानी रखने और जलस्तर बढ़ने पर आसपास के लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा है। उन्होंने भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील सड़कों एवं क्षेत्रों में जेसीबी एवं अन्य आवश्यक मशीनरी को रणनीतिक स्थानों पर तैयार रखने को भी कहा, ताकि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तत्काल यातायात सुचारू किया जा सके।
उन्होंने सभी विभागों के मध्य बेहतर समन्वय पर भी बल दिया। संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव दलों की तैनाती तथा आवश्यक उपकरण एवं संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
यात्रा स्थगित नहीं, भारी वर्षा में यात्रियों को रोकेंगे
उधर, मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने भी गढ़वाल मंडल के सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक में मौसम विभाग की चेतावनी के दृष्टिगत विमर्श किया। जिलाधिकारियों से प्राप्त फीडबैक और स्थानीय परिस्थितियों के उपरांत निर्णय लिया गया कि राज्य में चल रही चारधाम यात्रा को स्थगित न करते हुए भारी वर्षा की स्थिति में यात्रियों को निकटतम ठहराव वाले स्थलों में रोका जाएगा।
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मंडलायुक्त के अनुसार यात्रा मार्गों पर मौसम और सड़क की स्थिति की निगरानी की जा रही है। यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन नंबर पर करें संपर्क
किसी भी आपात स्थिति में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के टोल फ्री 1070, जिला आपातकालीन संचालन केंद्र के नंबर 1077 तथा आपातकालीन सेवा 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
