सरकारी कर्मियों के लिए जमीन खरीदने-बेचने के नियम बदले, धामी सरकार ने जारी की अधिसूचना
उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए संपत्ति के लेन-देन और व्यावसायिक हितों से जुड़े नियमों में संशोधन किया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारी अब सरकार के साथ लेनदेन करने वाले व्यक्ति, फर्म, कंपनी या संस्थान से जमीन खरीदने अथवा बेचने के लिए बिना पूर्व अनुमति के कदम नहीं उठा सकेंगे।
राज्य सरकार ने कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन कर संपत्ति के लेन-देन और कर्मचारियों के व्यावसायिक हितों से जुड़े प्रविधानों को स्पष्ट किया है।
अधिसूचना जारी
साथ ही कर्मचारियों की पत्नी या उन पर आश्रित रिश्तेदारों के तैनाती वाले जिले में बीमा एजेंट के रूप में काम करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। कार्मिक विभाग ने संशोधित नियमावली की अधिसूचना जारी कर दी है।
कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में संशोधित प्रविधानों के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी ऐसे व्यक्ति, फर्म, कंपनी या संस्थान से अचल संपत्ति का खरीद या बिक्री या आदान-प्रदान नहीं कर सकेगा, जिसका सरकार के साथ कोई लेन-देन हो, जब तक इसके लिए निर्धारित अनुमति प्राप्त न कर ली जाए।
कर्मचारी को अपने नाम या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर जमीन अथवा अन्य अचल संपत्ति खरीदने, बेचने या उपहार में लेने संबंधी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
संपत्ति का विवरण देना होगा अनिवार्य
नियमावली में कर्मचारियों की संपत्ति का विवरण देने की व्यवस्था भी स्पष्ट की गई है। समूह-क, ख और ग के कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष अपनी संपत्ति का विवरण नियुक्ति प्राधिकारी को देना होगा, जबकि समूह-घ के कर्मचारियों के लिए यह अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है।
दो माह के मूल वेतन से अधिक की खरीद की देनी होगी सूचना
इसके अलावा, कोई भी कर्मचारी अपने दो माह के मूल वेतन से अधिक कीमत की चल संपत्ति खरीदने या बेचने पर इसकी सूचना एक माह के भीतर नियुक्ति प्राधिकारी को देगा। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के संपत्ति संबंधी लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
