नई फिल्म नीति: मुंबई का सफर हुआ छोटा, अब उत्तराखंड में मिल रहा काम
उत्तराखंड की नई फिल्म नीति ने बड़े बैनर और स्थानीय सिनेमा दोनों को बढ़ावा दिया है, जिससे स्थानीय युवाओं के ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
सुमित थपलियाल, देहरादून। कभी उत्तराखंड के युवाओं के लिए फिल्मों में जगह बनाने का मतलब मुंबई की राह पकड़ना था। अब कैमरे का रुख पहाड़ की ओर हुआ है तो यहां के युवाओं को भी अपने हुनर के लिए घर से दूर नहीं जाना पड़ रहा।
उत्तराखंड में बड़े बैनर की हिंदी फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग बढ़ने के साथ स्थानीय सिनेमा भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की नई फिल्म नीति ने न सिर्फ प्रदेश को फिल्म शूटिंग का पसंदीदा गंतव्य बनाया है, बल्कि स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और फिल्म निर्माताओं के लिए भी अवसरों के नए द्वार खोल दिए हैं।
यह भी पढ़ें- उत्तराखंड फिल्म नीति, धामी सरकार की पहल फिल्म जगत में चमकेंगे उत्तराखंड के युवा
इसका असर पर्दे पर दिखने के साथ ही कैमरे के पीछे काम करने वालों पर भी पड़ा है। अभिनय, कैमरा, मेकअप, लाइन प्रोडक्शन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं के लिए अवसर बढ़े हैं।
देवभूमि की प्राकृतिक सुंदरता, बेहतर सड़क और हवाई संपर्क तथा सरकार की आकर्षक सब्सिडी नीति का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। बड़े बैनर की हिंदी फिल्मों और वेब सीरीज के साथ-साथ स्थानीय फिल्मों का निर्माण भी तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा लाभ उन युवाओं को मिल रहा है, जिन्हें अब अभिनय, तकनीकी कार्य, लाइन प्रोडक्शन और फिल्म निर्माण में अपने ही प्रदेश में काम मिल रहा है।
सरकार की फिल्म नीति के तहत हिंदी और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं की फिल्मों को उत्तराखंड में किए गए व्यय का 30 प्रतिशत या अधिकतम तीन करोड़ रुपये तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं, स्थानीय फिल्मों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलने से क्षेत्रीय फिल्म उद्योग को नई ऊर्जा मिली है। यही वजह है कि फिल्म निर्माता-निर्देशक अब उत्तराखंड को शूटिंग के लिए प्राथमिकता दे रहे हैं।
दो दर्जन से अधिक फिल्म व वेब सीरीज हुई शूट
बीते वर्ष प्रदेश में 10 से 12 बड़े बैनर की हिंदी फिल्में और वेब सीरीज शूट हुईं। वहीं, स्थानीय स्तर पर 15 फिल्में रिलीज हुईं। इस वर्ष भी हरिद्वार, मसूरी और अन्य स्थानों पर कई फिल्मों की शूटिंग जारी है। स्थानीय फिल्म उद्योग भी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
यह भी पढ़ें- बिहार की नई फिल्म नीति से बढ़ेगा पर्यटन और रोजगार; अवैध खनन पर भी होगी सख्त कार्रवाई
इस वर्ष लगभग 20 स्थानीय फिल्मों के रिलीज होने की उम्मीद है, जिनमें से चार पहले ही सिनेमाघरों तक पहुंच चुकी हैं। जल्द ही एक पंजाबी और एक तेलुगु फिल्म की शूटिंग भी उत्तराखंड में शुरू होने वाली है।
मुंबई का सफर हुआ छोटा, अपने प्रदेश में भी काम
फिल्म अभिनेत्री रूप दुर्गापाल कहती हैं कि पहले कलाकारों को काम के लिए मुंबई जाना मजबूरी थी, लेकिन अब उत्तराखंड में लगातार शूटिंग होने से स्थानीय प्रतिभाओं को यहां भी बेहतर अवसर मिलने लगे हैं।
नियमित फिल्म निर्माण से कलाकारों के साथ तकनीकी कर्मियों को भी रोजगार मिलेगा और पलायन पर भी अंकुश लगेगा। बेहतर हवाई और सड़क संपर्क ने भी फिल्म उद्योग के लिए उत्तराखंड को अधिक सुविधाजनक बना दिया है।
पांच गुना बढ़ा स्थानीय फिल्मों का निर्माण
स्थानीय फिल्म निर्देशक देबू रावत बताते हैं कि वर्ष 2019 में ''''कन्यादान'''' और 2021 में ''''ठोकदार'''' जैसी गिनी-चुनी फिल्में बनी थीं। लेकिन 14 मार्च 2024 से फिल्म सब्सिडी का लाभ मिलने के बाद स्थानीय फिल्म उद्योग ने रफ्तार पकड़ ली।
वर्ष 2025 में 15 स्थानीय फिल्में बनीं, जबकि इस वर्ष अब तक पांच फिल्में रिलीज हो चुकी हैं और कई निर्माणाधीन हैं। पहले की तुलना में फिल्म निर्माण लगभग पांच गुना बढ़ गया है।
एक फिल्म से 50-60 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। सबसे अच्छी बात यह है कि ''''जोना'''' और ''''घपरोल'''' जैसी फिल्मों में नए निर्देशक, नए कलाकार और स्थानीय तकनीशियनों को भी अवसर मिल रहा है।
