हरदा के कार्यकाल में उत्तराखंड ने झेला सबसे बड़ा सियासी संकट, पहली बार लगा राष्ट्रपति शासन
हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उत्तराखंड ने 2016 में सबसे बड़ा सियासी संकट झेला, जब कांग्रेस के 9 विधायकों ...और पढ़ें

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत।

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निर्मला बोहरा, उत्तराखंड। भले ही उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत राज्य में कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं, लेकिन इन्हीं के कार्यकाल में प्रदेश ने सबसे बड़ा सियासी संकट भी झेला। 2016 उत्तराखंड में सियायी उठापटक के बीच राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
तब उत्तराखंड राज्य अपने 16वें साल में था। वर्ष 2016 में पहली बार एक साथ कांग्रेस के नौ विधायकों ने बगावत कर दी। इसी बीच हरीश रावत के खिलाफ बागी विधायकों ने विधायकों की खरीद-फरोख्त का एक स्टिंग वीडियो जारी किया। जिसके बाद केंद्र ने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई और उत्तराखंड में राष्ट्रापति शासन लगा दिया।
पहली बार लगा राष्ट्रपति शासन
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तीन बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने, लेकिन एक बार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। 2014 में जब हरीश रावत पहली बार मुख्यमंत्री बने। दो साल बाद 18 मार्च 2016 को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस के नौ विधायकों ने बगावत कर दी। 27 मार्च को राजनैतिक अस्थिरता के चलते प्रदेश के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
हाईकोर्ट के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट के निर्देश के बाद 10 मई को फ्लोर टेस्ट हुआ। जिसमें हरीश रावत ने बहुमत साबित कर अपनी सरकार बचा ली। इस दौरान कोर्ट ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त किए जाने के आदेश को बरकरार रखा।
हरीश रावत तीन बार बने उत्तराखंड के सीएम
- एक फरवरी 2014
- 1 अप्रैल 2016
- 11 मई 2016
ये था पूरा सियासी घटनाक्रम
- 18 मार्च 2016 को राज्य विधानसभा में विनियोग विधेयक पर भाजपा ने मत विभाजन की मांग की। कांग्रेस के नौ विधायकों ने इसका समर्थन किया।
- राज्यपाल ने हरीश रावत सरकार को 28 मार्च 2016 को बहुमत साबित करने को कहा।
- एक निजी चैनल ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया, जिसमें मुख्यमंत्री रावत खुद 28 मार्च 2016 को होने वाले विश्वास मत हासिल करने के लिए पार्टी के बागी विधायकों के साथ कथित तौर पर सौदेबाजी करते नजर आए।
- केंद्र ने फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले 27 मार्च 2016 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।
- सुप्रीम कोर्ट ने हरीश रावत को 29 अप्रैल 2016 को बहुमत साबित करने का भी आदेश दे दिया।
- 10 मई 2016 को राज्य के मुख्य सचिव की देखरेख में उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हुआ।
- फ्लोर टेस्ट रावत सरकार के पक्ष में 33 और विपक्ष में 28 मत मिले।
- 11 मई 2016 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश की।
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