हरीश रावत के इस्तीफे से कांग्रेस में सियासी भूचाल, प्रदेश अध्यक्ष बोले- '10 साल पहले हो चुकी कार्रवाई'
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने विशेष कार्याधिकारी के घर ईडी छापेमारी और नकदी मिलने के बाद कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।

गणेश गोदियाल और हरीश रावत।

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के घर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी और नकदी बरामद होने का मामला सामने आने के बाद उन्होंने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।
हरीश रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य और दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य पद से त्यागपत्र देने की घोषणा की है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया में यह जानकारी साझा की है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को ऐसे मुद्दे पर घेरा जा रहा है, जिस पर 10 साल पहले रावत ने कठोर कार्रवाई की थी।
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय नेतृत्व, विशेष रूप से राहुल गांधी, भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में पार्टी के किसी नेता या पदाधिकारी से जुड़े विवादों के कारण इस मुहिम पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी नैतिक और सैद्धांतिक आधार पर उन्होंने पार्टी के पदों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका निर्णय पार्टी नेतृत्व और कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई के प्रति अपनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस की मुहिम को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है और किसी भी प्रकार का विवाद राष्ट्रीय नेतृत्व के संघर्ष को कमजोर नहीं करना चाहिए।
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हरीश रावत के इस कदम को कांग्रेस के भीतर नैतिक जिम्मेदारी लेने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस्तीफे से उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति में भी नई चर्चा शुरू हो गई है।
