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प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपरलीक से उत्तराखंड भी अछूता नहीं, 2022 से 23 में रद हुई थीं 13 भर्ती

Published: Thu, 14 May 2026 12:31 PM (GMT+05:30)

उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक और नकल के मामले सामने आए हैं, जिससे 2022-23 में 13 भर्ती परीक्षाएं रद्द हुईं।

नकल एवं पेपरलीक रोकने को धामी सरकार लाई सख्त नकलरोधी कानून।

नकल एवं पेपरलीक रोकने को धामी सरकार लाई सख्त नकलरोधी कानून।

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संक्षेप में पढ़ें

अशोक केडियाल, देहरादून । प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपरलीक और नकल के मामलों से उत्तराखंड भी अछूता नहीं रहा है। वर्ष 2022-23 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की समूह-ग भर्ती परीक्षाओं में लगातार धांधली और पेपरलीक के मामले सामने आने के बाद प्रदेशभर में बड़ा विवाद खड़ा हुआ था।

मामलों की जांच के लिए गठित एसआइटी ने जांच में 13 भर्ती परीक्षाओं में नकल और पेपरलीक की पुष्टि की, जिसके बाद इन परीक्षाओं को निरस्त कर पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा था।

भर्ती परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियों के बाद समूह-ग की परीक्षाएं आयोग से लेकर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को सौंप दी गईं थी, लेकिन वहां भी नकल के मामलों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर युवाओं नाखुश दिखे थे।

यूकेएसएसएससी की इन परीक्षाओं में पकड़ी गई नकल

स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा, वन दरोगा भर्ती परीक्षा, सचिवालय रक्षक, कनिष्ठ सहायक, पुलिस आरक्षी, आबकारी सिपाही, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, सहायक लेखाकार, प्रयोगशाला सहायक, मत्स्य निरीक्षक और राजस्व उपनिरीक्षक (पटवारी/ लेखपाल) भर्ती परीक्षाओं में धांधली और नकल के मामले सामने आए थे।

हरीश रावत सरकार के कार्यकाल से शुरू हुए आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में आयोजित वर्ष 2015 की राजस्व उपनिरीक्षक (पटवारी/ लेखपाल) भर्ती परीक्षा में भी धांधली और नकल के आरोप लगे थे। भाजपा सरकार बनने के बाद मामले की एसआइटी जांच हुई, जिसमें कई अभ्यर्थियों, बिचौलियों तथा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष आरबीएस रावत को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

वर्ष 2024 में बना सख्त नकलरोधी कानून

पेपरलीक और नकल पर अंकुश लगाने के लिए वर्ष 2024 में धामी सरकार ने सख्त नकलरोधी कानून लागू किया। कानून में दोषियों के लिए कठोर सजा, भारी जुर्माना और संपत्ति जब्ती जैसे प्रविधान किए गए। सरकार के अनुसार पेपरलीक मामलों में अब तक 100 से अधिक आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं।

21 सितंबर, 2025 को फिर पेपरलीक, परीक्षा निरस्त

21 सितंबर, 2025 को दोबारा आयोजित 416 पदों की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में भी हरिद्वार के एक केंद्र से पेपरलीक का मामला सामने आया। आरोपित अभ्यर्थी खालिद द्वारा प्रश्नपत्र के पन्ने व्हाट्सएप पर अपनी महिला मित्र एसोसिएट प्रोफेसर सुमन को भेजे जाने के बाद मामला इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हो गया। सरकार ने परीक्षा निरस्त कर जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी, जिसकी जांच अभी जारी है।

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