उत्तराखंड के पांच जिलों में मतदाताओं घर फिर पहुंचेंगे बीएलओ, करेंगे डुप्लीकेट वोटर्स की पहचान
उत्तराखंड के पांच सीमावर्ती जिलों में बीएलओ ऐप के माध्यम से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दर्ज डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान का कार्य शुरू हो गया है।


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राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों स्थानों पर मतदाता के रूप में दर्ज व्यक्तियों की पहचान को फोटाे सिमिलर एंट्री (पीएसए) व डाटा सिमिलर एंट्री (डीएसए) का कार्य शुरू हो गया है।
यह कार्य उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़े पांच जिलों यानी देहरादून, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर में किया जा रहा है। फिलहाल आयोग ने बीएओ एप पर यह कार्य करने की सुविधा उपलब्ध की है।
एसआइआर के तहत राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भारत निर्वाचन आयोग से उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में डुप्लीकेट वोटरों की पहचान के लिए डीएसए व पीएसए की जांच कराने के लिए व्यवस्था करने का अनुरोध किया था।
बीएलओ एप में सुविधा
इस कड़ी में अब आयोग ने 21 सितंबर को बीएलओ एप में इसकी सुविधा उपलब्ध करा दी है। इसके तहत राज्य के इन पांच जिलों में ऐसे वोटर जिनका नाम, उम्र, अभिभावक का नाम व फोटो एक समान है उनकी सूची बीएलओ एप में नजर आ रही है।
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अब बीएलओ अपने क्षेत्र के ऐसे मतदाताओं के घर जाकर उन्हें इसकी जानकारी देंगे। उन्हें यह बताया जाएगा कि उनके नाम दोनों राज्यों में हैं। साथ ही उन्हें दोनों स्थानों पर मतदाता के रूप में नाम रखने के कारण दंड के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी। उनसे यह पूछा जाएगा कि वह अपना नाम किस जगह रखना चाहते हैं।
यदि मतदाता अपना नाम उत्तराखंड में ही रखना चाहता है तो उसकी पुष्टि एप में की जाएगी यदि वह नाम कटवाना चाहता है तो उससे फार्म सात भरवाया जाएगा और उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जाएगा। ईआरओ यह जानकारी उत्तर प्रदेश के संबंधित ईआरओ को भी भेजेंगे।
इस समय उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया शुरू हो गई है तो ऐसे में यह कार्य जल्द पूरी होने की उम्मीद है। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तूदास ने बताया कि बीएलओ एप में यह सुविधा मिल गई है और इस पर कार्य शुरू कर दिया गया है।
